कॉर्पोरेट नौकरी को लेकर असंतुष्ट होना आज के दौर में कोई नई बात नहीं है। लंबे काम के घंटे, लगातार बढ़ता वर्कलोड, मीटिंग्स और डेडलाइन के बीच कई कर्मचारी 9 से 5 की नौकरी से बाहर निकलने का सपना देखते हैं। सोशल मीडिया पर भी अक्सर कॉर्पोरेट लाइफ को लेकर लोगों की नाराजगी देखने को मिलती है। इसी बहस के बीच कंटेंट क्रिएटर दिशा देसाई ने एक ऐसा नजरिया साझा किया, जिसने नौकरी और आर्थिक सुरक्षा के बीच संतुलन पर सवाल खड़ा कर दिया। उनका कहना है कि अगर किसी को अपनी नौकरी से इतनी परेशानी है कि वह उससे बाहर निकलना चाहता है, तो केवल शिकायत करने के बजाय दूसरा रास्ता तैयार करने की कोशिश भी करनी चाहिए।
आखिर जब तक नया करियर या कमाई का जरिया तैयार नहीं होता, तब तक मौजूदा नौकरी की सैलरी ही किराए, घूमने-फिरने, रोजमर्रा के खर्च और भविष्य की बचत का सहारा बनी रहती है।
‘मुझे भी कॉर्पोरेट लाइफ से शिकायत थी’
इंस्टाग्राम अकाउंट @almostdailyyy पर वीडियो शेयर करते हुए दिशा ने स्वीकार किया कि वह खुद भी कॉर्पोरेट लाइफ को लेकर शिकायत कर चुकी हैं। हालांकि, अब उनका नजरिया बदल गया है। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति 9 से 5 की नौकरी से सच में बाहर निकलना चाहता है, तो उसे धीरे-धीरे कोई दूसरा करियर या कमाई का जरिया तैयार करना होगा।
सैलरी पसंद नहीं, लेकिन जिंदगी उसी से चलती है
दिशा ने अपनी बात रखते हुए एक अहम सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिस नौकरी को लोग रोज कोसते हैं, वही नौकरी अक्सर उनका किराया, छुट्टियां, दोस्तों के साथ घूमना, पार्टियां और भविष्य की सेविंग्स तक फंड कर रही होती है। ऐसे में हर दिन नौकरी को लेकर नाराज रहने के बजाय उसकी आर्थिक भूमिका को समझना जरूरी है।
नौकरी से प्यार जरूरी नहीं, लेकिन समझदारी जरूरी है
दिशा का कहना है कि हर किसी को अपनी नौकरी से प्यार करना जरूरी नहीं है। अगर काम पसंद नहीं है तो बदलाव की इच्छा बिल्कुल जायज है। लेकिन जब तक कोई बेहतर विकल्प या आय का दूसरा स्रोत तैयार नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा नौकरी से मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को नजरअंदाज करना भी समझदारी नहीं होगी।
‘जिस नौकरी से जिंदगी चल रही है, उससे इतनी नफरत क्यों?’
अपने पोस्ट के कैप्शन में भी उन्होंने इसी विचार को आगे बढ़ाया। उनका संदेश सीधा था अगर नौकरी आपकी जिंदगी का खर्च उठा रही है, तो हर दिन उसी से नफरत करते रहना शायद सबसे सही तरीका नहीं है। उनके मुताबिक, नौकरी को पसंद न करना अलग बात है, लेकिन उससे मिलने वाली आर्थिक स्थिरता को स्वीकार करना और साथ-साथ अपने लिए नया रास्ता तैयार करना ज्यादा व्यावहारिक सोच हो सकती है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- ‘ये है असली रियलिटी चेक’
दिशा की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रिया भी काफी सकारात्मक रही। कई लोगों ने उनके नजरिए को व्यावहारिक बताया। एक यूजर ने इसे पूरी तरह सही बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि 9 से 5 की नौकरी को देखने का यह काफी प्रैक्टिकल तरीका है। एक अन्य यूजर के मुताबिक, यह वह रियलिटी चेक है जिसकी कई लोगों को जरूरत है। कुछ लोगों ने यह भी माना कि कॉर्पोरेट लाइफ में परेशानियां जरूर हैं, लेकिन आर्थिक स्थिरता की अपनी अहमियत है।