आज भी जब हम किसी शाही महल की तस्वीर देखते हैं, तो वह भव्य, चमचमाता और शानदार नजर आता है। हर कोई यही सोचता है कि वहां रहने वाले राजा-रानी आराम और सुख-सुविधा में लिप्त रहते होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सच इसके बिल्कुल उलट था? कई महल इतने गंदे, अव्यवस्थित और अस्वच्छ होते थे कि उनमें रहना कभी-कभी जैसे साहसिक चुनौती बन जाता था। खासकर इंग्लैंड के राजा हेनरी-8 के महल की बात ही लें। हजारों दरबारी और कर्मचारियों के साथ रहने के कारण उनके महल में चूहे, खटमल, जूं और गंदगी इतनी तेजी से फैल जाती थी कि महलों को खाली करना और महीनों तक साफ करना पड़ता था। भव्यता की आड़ में छिपा यह गंदा सच यह बताता है कि शाही जीवन की चमक-धमक के पीछे कितनी कठिनाइयाँ और अव्यवस्था थी।
जुलाई 1535 में हेनरी-8 और उनके 700 से अधिक दरबारी चार महीने के लिए लगभग 30 शाही महलों और धार्मिक संस्थानों का दौरा करने निकले थे। आधिकारिक रूप से ये दौरा जनता के साथ मेलजोल और निष्ठा बढ़ाने के लिए बताया गया, लेकिन असल में मकसद महलों की गंदगी से बचना और सफाई का इंतजार करना था।
महल बन जाते थे गंदगी का अड्डा
महलों में इतनी जल्दी गंदगी जमा हो जाती थी कि कुछ ही दिनों में चूहे, खटमल, जूं, मानव मल और बासी भोजन फैल जाते थे। गलियारे आग और धूल से कालिख से काले पड़ जाते थे। इतने बड़े दरबार के रहने से गंदगी इतनी बढ़ जाती थी कि राजा और उनके परिवार के लिए रहना मुश्किल हो जाता था।
सफाई के लिए महल खाली करना पड़ता था
हेनरी-8 अपने लंदन महल को छोड़कर दौरे पर इसलिए निकलते थे ताकि उनके महल पूरी तरह खाली रहें और सफाई की जा सके। हैम्पटन कोर्ट जैसे महलों को महीनों तक साफ करने में समय लग जाता था। हजारों लोगों के रहने से उत्पन्न गंदगी और बदबू से निपटना एक चुनौती बन गया था।
चूहे, खटमल और जूं से बचाव के नियम
राजा अपने महलों में चूहों और कीड़ों से बचने के लिए फर से बने बिस्तरों का इस्तेमाल करते थे। साथ ही आने वाले लोगों और दरबारियों को चेतावनी दी जाती थी कि वो राजा के किसी भी सामान को न छुएं। महलों में साफ-सफाई बनाए रखने के लिए राजा ने कई नियम बनाए। बगीचों की दीवारों पर पेशाब करने से रोकने के लिए बड़े लाल X के निशान बनवाए गए।
रसोई और स्वच्छता पर सख्त नियंत्रण
शाही रसोई में रसोइयों के बिना कपड़े या गंदे कपड़े पहनकर काम करने पर पाबंदी थी। उन्हें साफ कपड़े पहनना अनिवार्य था। महल खाली होते ही सीवर और अंडरग्राउंड कमरों में जमा गंदगी साफ करने के लिए विशेष कर्मचारी नियुक्त किए जाते थे।
इतिहासकारों और महल क्यूरेटरों के मुताबीक, चार सप्ताह तक किसी महल में रहने के बाद अंडरग्राउंड कमरों में गंदगी सिर तक जमा हो जाती थी। ये साफ-सफाई केवल एक कठिन काम नहीं बल्कि एक चुनौती थी, खासकर उन महलों में जहां हजारों दरबारी रहते थे।