दिल्ली में इस मानसून के मौसम में सांपों की संख्या में काफी वृद्धि देखने को मिल रही है। शहर के विभिन्न इलाकों जैसे सरकारी बंगलों से लेकर झुग्गी-झोपड़ी तक सांप नजर आ रहे हैं, जिससे लोगों में भय व्याप्त हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें मानसून के कारण सांप शहर के अंदर और लोगों के घरों में आने लगते हैं।
सांपों की इस बढ़ती सक्रियता के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण है दिल्ली का तेजी से बढ़ता शहरीकरण, जिससे उनके नैसर्गिक आवास कम हो गए हैं। पेड़-पौधे और खुला मैदान कम होने से सांपों को अपने लिए नई जगहें खोजनी पड़ती हैं जो अक्सर इंसानों के घर बन जाते हैं। इसके अलावा निर्माण कार्यों के कारण उनके प्राकृतिक बिलों का नुकसान होता है जिससे वे मीलों दूर जाकर सुरक्षित जगह तलाशते हैं।
मानसून में बारिश से जलभराव होता है जिससे सांपों के बिलों और रहने के ठिकानों में पानी भर जाता है और वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में घरों और बाजारों में आ जाते हैं। इस दौरान उनकी खाद्य श्रृंखला भी बढ़ जाती है क्योंकि कीड़े, चूहों और मेंढकों की संख्या अधिक हो जाती है, जो सांपों का मुख्य भोजन होते हैं। इसलिए वे भोजन की तलाश में ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं।
दिल्ली वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस बार मई से जुलाई के बीच अब तक 157 सांपों को रेस्क्यू किया गया है। ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते, लेकिन उनका अचानक दिखना और डराना लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सांप को मारने या छूने की बजाय तुरंत वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम से संपर्क करना चाहिए।
सांपों के कतरा होने के मामलों में भी मानसून के दौरान इजाफा होता है। गिरते हुए सांपों या छिपने के लिए जगह न मिलने के कारण वे इंसानों के संपर्क में अधिक आते हैं। खास तौर पर गंदे और कचरे से भरे इलाके, खुले नालों और झाड़ियों के आसपास सावधानी बरतनी चाहिए।
सांपों से बचाव के लिए स्थानीय लोग कुछ सावधानियां अपनाएं जैसे घरों के आसपास झाड़-झंखाड़ साफ रखना, दीवारों और फर्श में किसी भी दरार या छेद को बंद करना, कूड़ा-कचरा न जमा होने देना और बच्चों को नंगे पैर बाहर खेलने से रोकना। अगर सांप घर में दिखे, तो विशेषज्ञों की मदद लें और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जाए।