आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई , अब लोगों की जिंदगी में एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है। AI ने इंसानी जिंदगी को आसान बनाने के साथ-साथ लोगों का बचाने का भी काम कर रही है। बिहार से एक ऐसी ही खबर आई है कि, जहां AI की मदद से एक खोए बुजुर्ग को खोज निकाला गया। बिहार के गया में नीरज को एक बुजुर्ग मिले, जो अपने घर से बहुत दूर थे और सिर्फ अपने गांव का नाम बता पा रहे थे। नीरज ने उन्हें अपने घर में रखा, उनके परिवार को खोजा और आखिरकार 1,200 किलोमीटर से ज्यादा दूर पंजाब में उन्हें उनके परिवार से मिला दिया।
अमृतसर में एक बुजुर्ग अपनी ही तीर्थयात्रा के दौरान रास्ता भटककर सीधे 1200 किलोमीटर दूर बिहार के गया जा पहुंचे थे। पंजाब के लुधियाना के रहने वाले चमन लाल लंबे समय से भूलने की समस्या से जूझ रहे हैं। पंजाब सरकार की तीर्थयात्रा योजना के तहत अमृतसर गए थे लेकिन वहां से वे न जाने कैसे ट्रेन पकड़कर गया पहुंच गए। इसके बाद वह बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गए और अपने घर से 1,200 किलोमीटर से ज्यादा दूर बिहार के गया पहुंच गए।
घर से 1200 किमी दूर पहुंचे चमन लाल
चार दिनों तक चमन लाल पंजाब से सैकड़ों किलोमीटर दूर एक ऐसे परिवार के साथ रहे, जिसे वह पहले कभी नहीं जानते थे। इस दौरान एक अजनबी व्यक्ति उनके घर और पहचान के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहा था। बुजुर्ग चमन लाल के पास बताने के लिए ज्यादा जानकारी नहीं थी। वह सिर्फ पंजाबी बोलते थे और उन्हें अपने गांव का नाम फतेहगढ़ गुजरान ही याद था।
गया में नीरज की मुलाकात चमन लाल से हुई। वह बुजुर्ग काफी परेशान और भूखे थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह गया कैसे पहुंचे। नीरज ने उन्हें अकेला छोड़ने के बजाय अपने घर ले जाकर खाना और रहने की जगह दी। इसके साथ ही उन्होंने चमन लाल के परिवार को ढूंढने की कोशिश शुरू की। भाषा की परेशानी के कारण यह काम आसान नहीं था, क्योंकि चमन लाल सिर्फ पंजाबी बोलते थे। हालांकि, उन्होंने नीरज को अपने गांव का नाम बता दिया, जिससे उनके परिवार को खोजने में मदद मिली।
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गया के रहने वाले नीरज ने पंजाब में उस गांव का पता लगाने के लिए ऑनलाइन सर्च और चैटजीपीटी की मदद ली। आखिरकार, गांव का यही नाम चमन लाल के परिवार तक पहुंचने की अहम कड़ी साबित हुआ। करीब तीन दिनों की कोशिश के बाद नीरज को लुधियाना जिले में माछीवाड़ा साहिब के पास फतेहगढ़ गुजरान गांव के बारे में जानकारी मिली। इससे चमन लाल के परिवार तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया। जगह का पता चलने के बाद भी नीरज ने चमन लाल को अकेले जाने नहीं दिया। वह खुद उनके साथ गया से लुधियाना पहुंचे और फिर माछीवाड़ा की ओर गए, ताकि चमन लाल को सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाया जा सके।
नीरज ने पेश की इंसानियत की मिसाल
माछीवाड़ा पहुंचने के बाद नीरज ने वहां के लोगों को चमन लाल की फोटो दिखाकर उनके बारे में पूछा। आखिरकार मास्टर कृष्ण लाल ने फोटो देखकर चमन लाल को पहचान लिया। इसके बाद उनके परिवार को जानकारी दी गई। चमन लाल के पोते सुखचैन सिंह माछीवाड़ा पहुंचे और उन्होंने पहचान की कि गया से नीरज जिन बुजुर्ग को अपने साथ लाए थे, वे उनके दादा चमन लाल ही हैं। इसके बाद चमन लाल के परिवार को इसकी जानकारी दी गई। उनके पोते सुखचैन सिंह माछीवाड़ा पहुंचे और उन्होंने पुष्टि की कि नीरज गया से जिस बुजुर्ग को अपने साथ लाए थे, वह उनके दादा चमन लाल ही हैं।
जब नीरज चमन लाल के घर पहुंचे तो परिवार ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। परिवार ने धन्यवाद के तौर पर उन्हें पैसे और कपड़े भी दिए। गया में कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले नीरज ने बताया कि उन्हें लगा कि वह एक अकेले और परेशान बुजुर्ग को इस हालत में नहीं छोड़ सकते। जब उन्हें चमन लाल के गांव का नाम पता चला, तो उनके परिवार को ढूंढकर उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाना नीरज ने अपनी जिम्मेदारी समझी।