20 लाख खर्च कर MBA ग्रेजुएट ने शुरू की शिमला मिर्च की खेती, सालाना 2.25 करोड़ का कमा रही मुनाफा
MBA ग्रेजुएट प्रणिता वामन एक समझारीभरे इन्वेंटमेंट के बाद आज करोड़ों का मुनाफा कमा रही हैं। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उन्होंने एक एकड़ जमीन पर शिमला मिर्च की खेती करनी शुरू की थी। आज उनके 25 एकड़ के फार्म में पॉलीहाउस और शेड नेट यूज हो रहा है। प्रणिता का सालाना टर्नओवर 4 करोड़ रुपये है।
प्रणिता वामन महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नार तालुक के कलवाड़ी गांव से ताल्लुक रखती हैं। वह एक किसान परिवार में पली-बढ़ी हैं।
MBA ग्रेजुएट प्रणिता वामन ने कोरोना काल में 20 लाख का एक समझदारीभरा निवेश किया था, जिसके बाद से आज वह करोड़ों का प्रोफिट कमा रही हैं। उन्होंने COVID-19 लॉकडाउन के दौरान शिमला मिर्च की खेती करनी शुरू की थी। एक एकड़ से शुरू हुआ काम आज 25 एकड़ के फार्म तक पहुंच चुका है। उनका टर्नओवर 4 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।
30Stades की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी ये जर्नी फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में इंटर्नशिप के साथ शुरू हुई थी, जहां उन्होंने मॉर्डन एग्रीकल्चर (आधुनिक खेती) में संभावनाओं को खोजा । 2020 में एक एकड़ पॉलीहाउस खेती से शुरू हुआ यह काम अब 25 एकड़ के खेती के कारोबार में तक पहुंच गया है, जिससे प्रणिता वामन का सालाना ₹4 करोड़ का टर्नओवर होता है।
MBA से खेती तक का सफर
प्रणिता वामन महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नार तालुका के कलवाड़ी गांव से ताल्लुक रखती हैं। वह एक किसान परिवार में पली-बढ़ी हैं। उनके पिता टीचर थे, लेकिन वॉलंटरी रिटायरमेंट लेने के बाद भी वे फलों और सब्जियों की खेती से जुड़े रहे। उन्होंने 2019 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज पुणे से एग्री बिजनेस मैनेजमेंट में MBA किया है। अपनी डिग्री करने के बाद उन्होंने एक फूड प्रोसेसिंग कंपनी में इंटर्नशिप करनी शुरू किया था।
इंटरर्नशिप से मिले एक्सपीरिएंस ने वामन को हाई-टेक खेती, खासकर पॉलीहाउस खेती के बारे में जानने के लिए काफी मोटीवेट किया। कम संसाधन में किसान फसल उगाने की स्थितियों को कैसे मैनेज कर सकते हैं, फसल की पैदावार और क्वालिटी बेहतर कैसे बना सकते हैं और पौधों को खराब मौसम से कैसे बचा सकते हैं? यह सब उन्होंने सीखा। बदलते मौसम के पैटर्न को देखते हुए कंट्रोल किए गए माहौल में सही तरीके से खेती आसानी से की जा सकती है।
वामन ने बताया कि हम तेजी से बदलते मौसम का सामना करते रहते हैं। आज लगातार अच्छी कमाई करने का एकमात्र तरीका हाई-टेक खेती है। यह बेहद फायदेमंद भी है।
प्रणिता ने शिमला मिर्च की खेती को ही क्यों चुना?
MBA ग्रेजुएट ने कहा खेती करने की प्लानिंग तो करली गई, लेकिन फिर हमारे सामने अगला सवाल यह था कि क्या उगाया जाए? वामन ने शिमला मिर्च (कैप्सिकम) को चुनने से पहले लेट्यूस और ब्रोकली जैसी कई सब्जियों को उगाने के बारे में भी विचार किया था। आखिरकार फिर उन्होंने शिमला मिर्च की फसल को चुना क्योंकि इसकी मांग हर मौसम में बनी रहती है।
वामन ने कहा कि "मैंने लेट्यूस, ब्रोकली और दूसरी विदेशी सब्जियों की खेती करने के बारे में विचार किया था। लेकिन शिमला मिर्च की मांग की डिमांड को देखते हुए हमने इसे फाइनल किया। शिमला मिर्च सालभर डिमांड में रहती है। इसका कोई खास सीजन नहीं होता है।
सालभर बाजार में रहती है डिमांड
ये शहरों के बाजारों में सालभर बिकती है। शिमला का यूज होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस में बड़े पैमाने पर किया जाता है। खासकर लाल और पीली शिमला मिर्च अक्सर हरी शिमला मिर्च के मुकाबले ज्यादा महंगी बिकती हैं। इस फसल का एक बड़ा इंटरनेशनल मार्केट भी है।
वामन के मुताबिक उन्होंने मार्च 2020 में वामन ने 50% सरकारी सब्सिडी के साथ 20 लाख रुपये का निवेश करके एक पॉलीहाउस में एक एकड़ ज़मीन पर शिमला मिर्च की खेती शुरू की थी। उन्होंने KVK बारामती से लाए गए 12,000 पौधे लगाए थे। फसल जून-जुलाई में पूरी तरह से तैयार हो गई थी। लेकिन उनकी पहली फसल कटने का समय कोविड-19 लॉकडाउन लग गया था, जिससे बाजार बुरी तरह से प्रभावित हुए थे।
खरीदार ढूंढना था चुनौती
कमर्शियल खेती में नए होने की वजह से खरीदार ढूंढना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी। वामन ने माना "फील्ड में नई होने के नाते मुझे ये पता नहीं था कि अपनी फसल को कहां बेचना है। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन थोक सब्जी खरीदारों को ढूंढना शुरू किया। अपनी फसल बेचने के लिए उन्होंने नासिक से लेकर मुंबई तक के व्यापारियों से संपर्क किया। वामन ने बताया कि काफी मशक्कत के बाद मुझे शिमला मिर्च खरीदने के लिए एक व्यापारी मिला था। लॉकडाउन के दौरान कई किसानों ने इसकी खेती बंद कर दी थी।"
उनकी पहली फसल में 40 टन लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च हुई, जो 80 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकी थी। इससे उन्होंने 32 लाख रुपये कमाए थे। अपना 20 लाख रुपये का इंवेस्टमेंट निकालने के बाद वामन ने 2021 तक खेती का दायरा बढ़ाकर 1 से 25 एकड़ कर लिया था। इसमें छह एकड़ में पॉलीहाउस और 19 एकड़ में शेड नेट का इस्तेमाल किया, जिनसे अलग-अलग पैदावार और कीमतें मिलीं।
जानकारी के लिए बता दें कि पॉलीहाउस खेती से सालाना प्रति एकड़ लगभग 30-32 टन पैदावार मिलती है, जबकि शेड नेट के तहत यह 22-24 टन होती है। वामन ने बताया कि पॉलीहाउस से उन्हें प्रति एकड़ 30 लाख रुपये का टर्नओवर होता है, जिसमें 8-10 लाख रुपये का खर्च आता है। 25 एकड़ में वह सालाना 4 करोड़ रुपये का टर्नओवर और लगभग 2.25 करोड़ रुपये का मुनाफा आराम से कमा लेती हैं।