12 लाख की सैलरी से 1.25 करोड़ का पैकेज..., इंजीनियर कार्तिक मोदी ने नेगोशिएट करने की इस कला से मारी बाजी

NIT से पढ़ाई करने वाले कार्तिक मोदी की इस सक्सेसफुल जर्नी को एक्सप्लोर किया है। उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कुछ खास टेक्निक को अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में शेयर किया है।

अपडेटेड Apr 18, 2026 पर 10:52 AM
Story continues below Advertisement
कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले हर शख्स का सपना होता है कि उसका करियर ग्राफ और सैलरी दोनों तेजी से बढ़ें, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके लिए सही रणनीति क्या होनी चाहिए।

कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले हर शख्स का सपना होता है कि उसका करियर ग्राफ और सैलरी दोनों तेजी से बढ़ें, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके लिए सही रणनीति क्या होनी चाहिए। इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के एक पूर्व इंजीनियर का इंस्टाग्राम पोस्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे उन्होंने अपनी सालाना सैलरी को 12 लाख रुपये (LPA) से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये तक पहुंचाया।

हमारी सहयोगी वेबसाइट मनी कंट्रोल इंग्लिश की श्वेता सिंह ने अपनी खास रिपोर्ट में NIT से पढ़ाई करने वाले कार्तिक मोदी की इस सक्सेसफुल जर्नी को एक्सप्लोर किया है। कार्तिक मोदी ने अपने करियर में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, उबर और जोमैटो जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ काम किया है। उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कुछ खास टेक्निक को अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में शेयर किया है।

'सैलरी से पहले लर्निंग' पर फोकस


कार्तिक मोदी के अनुसार, शुरुआती सालों में उन्होंने हाई सैलरी के पीछे भागने के बजाय सीखने पर ध्यान दिया। उन्होंने ऐसी भूमिकाएं चुनीं जहां उन्हें काम की जिम्मेदारी मिली और फीडबैक तेजी से मिला। उनका कहना है कि उन्होंने सैलरी से पहले सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर दिया। यही कौशल आगे चलकर उनके बड़े पैकेज का आधार बना।

कब बदलें कंपनी?

अक्सर लोग थोड़ी सी परेशानी आने पर नौकरी बदल लेते हैं, लेकिन कार्तिक की राय अलग है। उनका साफ मानना है कि चुनौतियों से न भागें। उन्होंने कभी भी काम के मुश्किल होने के डर से नौकरी नहीं छोड़ी। कार्तिक के मुताबिक, उन्होंने कंपनी केवल तब बदली जब वहां उनकी ग्रोथ धीमी हो गई। उनका मानना है कि असहज होना विकास के लिए जरूरी है, लेकिन ठहराव करियर को पीछे धकेलता है।

बेहतर माहौल और टीम का चुनाव

कार्तिक ने अपने अनुभव से बताया कि आप किन लोगों के साथ काम करते हैं, इसका आपकी ग्रोथ पर बड़ा असर पड़ता है। कुशल और खुद से बेहतर प्रोफेशनल्स के साथ रहने से उनकी सोच, कोड क्वालिटी और करियर को लेकर उनकी एस्पिरेशंस में सुधार हुआ। बेहतर टीम के साथ रहने से सीखने की रफ्तार बढ़ जाती है।

इंटरव्यू की तैयारी है अलग काम

उन्होंने स्पष्ट किया कि रोजमर्रा का ऑफिस वर्क इंटरव्यू निकालने के लिए काफी नहीं है। इसके लिए अलग से मेहनत करनी पड़ती है। वे खुद को तैयार रखने के लिए नियमित रूप से डेटा स्ट्रक्चर, एल्गोरिदम और सिस्टम डिजाइन का अभ्यास करते थे। मार्केट में अपनी वैल्यू समझने के लिए उन्होंने इंटरव्यू देना जारी रखा और डेटा का इस्तेमाल कर बेहतर सैलरी के लिए मोलभाव (Negotiate) करना सीखा।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

कार्तिक की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. एक यूजर ने लिखा कि इनकम बढ़ना अच्छा लगता है, लेकिन स्ट्रक्चरल ग्रोथ (करियर का आधार) उससे कहीं ज्यादा मायने रखती है। वहीं, एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि अमेजन जैसी कंपनियों में SDE (सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर) का रोल उतना भी ग्लैमरस या चुनौतीपूर्ण नहीं होता जितना सुनाया जाता है। IT फील्ड पहले से ही थोड़ा ओवररेटेड है। एक तीसरे यूजर ने अन्य इंजीनियरिंग ब्रांचों की स्थिति पर चिंता जताते हुए पूछा कि जब भी इस ऐप पर रोल की बात होती है, तो वह हमेशा कंप्यूटर इंजीनियरिंग ही क्यों होती है? क्या बाकी ब्रांच के लोगों के लिए कोई जगह नहीं है या फिर सॉफ्टवेयर में जाना ही एक नियम बन गया है?

जो भी हो, कार्तिक मोदी की यह कहानी उन प्रोफेशनल्स के लिए एक सबक है जो शॉर्ट-कट के बजाय लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को अहमियत देते हैं। उनके मुताबिक, मार्केट वैल्यू को समझना, लगातार सीखते रहना और सही समय पर सही फैसले लेना ही करोड़ों के पैकेज की चाबी है। आप कार्तिक की इंस्टा पोस्ट में नीचे उनकी ये जर्नी देख सकते हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।