₹1 करोड़ सालाना की नौकरी छोड़कर खेती की राह चुनी, Uber India की पूर्व CMO ने बताया सफल होने का तरीका

करोड़ों की कॉर्पोरेट दुनिया छोड़कर गुप्ता अब पंचकूला के पास एक फार्म पर सुकून की जिंदगी जी रही हैं। कभी बड़े पद और अच्छी सैलरी वाली नौकरी करने वाली गुप्ता का घर अब पेड़ों और फसलों के बीच है। खास बात यह है कि इस बदलाव के पीछे अचानक लिया फैसला नहीं, बल्कि 12 साल की तैयारी है

अपडेटेड Sep 24, 2026 पर 1:46 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
फार्म लाइफ बाहर से जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी आसान नहीं है।

कभी करोड़ों रुपये की कॉर्पोरेट दुनिया का हिस्सा रहीं अवनी गुप्ता ने आज अपनी जिंदगी का रास्ता पूरी तरह बदल लिया है। बड़े ब्रांड्स में ऊंचे पदों पर काम करने के बाद अब वह पंचकूला के पास एक पर्माकल्चर फार्म में प्रकृति के बीच रह रही हैं। यहां न चमकदार ऑफिस है, न मीटिंग्स का दबाव और न ही शहर जैसी भागदौड़। चारों तरफ हजारों पेड़, अलग-अलग तरह की फसलें और मिट्टी से बना उनका साधारण घर है। खास बात यह है कि उन्होंने यह बदलाव अचानक नौकरी छोड़कर नहीं किया। इस नई जिंदगी की तैयारी करीब 12 साल पहले शुरू हो गई थी।

कॉर्पोरेट करियर के दौरान ही उन्होंने और उनके पति ने जमीन खरीदी और धीरे-धीरे फार्म लाइफ को समझना शुरू किया। मुंबई से गुरुग्राम और फिर पंचकूला तक का सफर तय करने के बाद उन्होंने आखिरकार शहर की नौकरी वाली जिंदगी को पीछे छोड़कर फार्म को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया।

20 हजार रुपये से शुरू हुआ सफर


गुप्ता ने 1997 में यूनिलीवर से अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय उनकी मासिक कमाई करीब 20 हजार रुपये थी। आगे चलकर उन्होंने Colgate-Palmolive, Axis Bank, Clix Capital और Uber जैसी कंपनियों में बड़े पद संभाले। Uber छोड़ने तक उनकी सालाना कमाई करीब 1 करोड़ रुपये पहुंच चुकी थी।

इसके बावजूद उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया से दूरी बनाने का फैसला किया। उनका कहना है कि नौकरी छोड़ते समय उन्हें ऐसा नहीं लगा कि वह पैसा छोड़ रही हैं, क्योंकि मानसिक रूप से वह पहले ही उस जीवन से आगे बढ़ चुकी थीं।

नौकरी छोड़ने से पहले जमीन पर शुरू कर दी थी तैयारी

गुप्ता और उनके पति ने 2010 में हरियाणा में जमीन खरीदी। उस वक्त दोनों अपने करियर के अच्छे दौर में थे। उन्होंने तुरंत शहर छोड़ने के बजाय धीरे-धीरे फार्म पर समय बिताना शुरू किया। पहले मुंबई से गुरुग्राम आए, फिर पंचकूला में दो साल रहे और आखिरकार फार्म को अपना स्थायी घर बना लिया। इस दौरान उन्हें यह समझने का मौका मिला कि ग्रामीण जीवन वास्तव में उनके लिए सही है या नहीं।

खेती को सिर्फ कमाई का जरिया समझना बड़ी भूल

गुप्ता का कहना है कि सिर्फ खेती करके कॉर्पोरेट सैलरी जैसी कमाई की उम्मीद करना सही नहीं है। उदाहरण के तौर पर, ऑर्गेनिक पालक का एक बंडल सीधे ग्राहक को करीब 40 रुपये में बिक सकता है, लेकिन थोक बाजार में इसकी कीमत काफी कम हो सकती है। इसीलिए उन्होंने फार्म की कमाई को एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं रखा। बीजों की ऑनलाइन बिक्री, फार्म स्टे, टूर, ट्रेनिंग, कंसल्टेंसी, यूट्यूब और अतिरिक्त उपज बेचने समेत कई माध्यमों से आमदनी होती है।

यहां Blinkit-Zomato नहीं, मौसम तय करता है तनाव

फार्म लाइफ बाहर से जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी आसान नहीं है। यहां तुरंत डिलीवरी, आसान कचरा प्रबंधन और शहर जैसी सुविधाएं नहीं हैं। सामाजिक मेल-जोल भी कम हो सकता है। गुप्ता के मुताबिक, कॉर्पोरेट जीवन का तनाव अब मौसम और फसलों से जुड़ गया है। तेज बारिश से बाढ़ की चिंता होती है और बारिश कम हो तो खेती प्रभावित होने का डर रहता है।

उनका मंत्र- पहले आजमाएं, फिर नौकरी छोड़ें

गुप्ता का सबसे अहम संदेश उन लोगों के लिए है जो कॉर्पोरेट जिंदगी छोड़कर गांव या फार्म पर बसने का सपना देखते हैं। उनका कहना है कि इसे अचानक फैसला बनाने के बजाय नौकरी के साथ-साथ धीरे-धीरे तैयार करना चाहिए। उनके मुताबिक, ग्रामीण जीवन को सोशल मीडिया की खूबसूरत तस्वीरों से नहीं, उसकी वास्तविक चुनौतियों के साथ समझना जरूरी है। तभी यह बदलाव किसी पलायन के बजाय सोच-समझकर चुनी गई नई जिंदगी बन सकता है।

Gurugram Couple Monthly Expenses: 1.2 लाख रुपये का खर्च, जानें किराए से लेकर खाने तक कहां-कहां जाता है पैसा

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।