भारत में सरकारी नौकरी को लंबे समय से सुरक्षित करियर और अच्छी जिंदगी की गारंटी के तौर पर देखा जाता है। कई परिवारों में बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी सालों पहले शुरू कर देते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल की मधुरिमा के लिए सरकारी बैंक की नौकरी पाने का सपना पूरा होने के बाद कहानी कुछ अलग हो गई। अच्छी सैलरी के बावजूद काम का दबाव इतना बढ़ गया कि आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया।
दो साल की मेहनत के बाद मिली बैंक की नौकरी
मधुरिमा ने मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब दो साल तक IBPS परीक्षा की तैयारी की। मेहनत रंग लाई और अक्टूबर 2022 में उन्हें सरकारी बैंक में नौकरी मिल गई। उनकी पोस्टिंग ग्रामीण कर्नाटक की एक शाखा में हुई, जहां उन्हें करीब नौ महीने की ट्रेनिंग भी पूरी करनी थी। शुरुआत में सबकुछ अच्छा लग रहा था। उनकी इन-हैंड सैलरी करीब 70 हजार रुपये थी और हाउस रेंट अलाउंस भी मिलता था। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि अच्छी सैलरी के साथ काम का दबाव भी काफी ज्यादा है।
सुबह 8:30 से रात 10:30 बजे तक काम
मधुरिमा के मुताबिक, उनका कामकाजी दिन सुबह करीब 8:30 बजे शुरू होता था और कई बार रात 10:30 बजे के बाद खत्म होता था। कई मौकों पर रविवार को भी काम करना पड़ता था। कैशियर के तौर पर उन्हें लंबे समय तक कैश काउंटर पर बैठे रहना पड़ता था। उनका कहना है कि लगातार काम के कारण उन्हें पर्याप्त ब्रेक तक नहीं मिल पाता था।
ब्रेक न मिलने से बिगड़ी तबीयत
मधुरिमा ने बताया कि कैश काउंटर पर लगातार काम करने के दौरान वह लंबे समय तक वहां से उठ नहीं पाती थीं। उनके अनुसार, सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक भी उन्हें ब्रेक नहीं मिलता था। उन्होंने दावा किया कि इस काम के तरीके का उनकी सेहत पर असर पड़ा और उन्हें गंभीर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI हो गया।
नौकरी का असर निजी जिंदगी पर भी पड़ा
मधुरिमा की शादी दिसंबर 2022 में हुई थी, जब वह ट्रेनिंग के दौर से गुजर रही थीं। उनका कहना है कि लंबे काम के घंटों के कारण उन्हें पति और ससुराल वालों के साथ समय बिताने का भी मौका कम मिलता था। उन्होंने एक वरिष्ठ कर्मचारी पर कथित तौर पर बदसलूकी और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया। मधुरिमा ने मामले की शिकायत HR से की। उनके मुताबिक, शिकायत के बाद उस कर्मचारी के व्यवहार में बदलाव आया।
दोस्त की शादी के लिए छुट्टी नहीं मिली
आखिरकार फरवरी 2024 में वह स्थिति आई, जब मधुरिमा के मुताबिक उन्हें अपनी दोस्त की शादी में शामिल होने के लिए छुट्टी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने का मन बना लिया और अगले महीने इस्तीफा दे दिया। लेकिन नौकरी छोड़ना इतना आसान नहीं था। बैंक छोड़ने के लिए उन्हें करीब 2 लाख रुपये की बॉन्ड पेनल्टी चुकानी पड़ी। नोटिस पीरियड के दौरान ही उन्होंने दूसरी नौकरी तलाशना शुरू कर दिया।
नई नौकरी में आधी से भी कम सैलरी
इसके बाद मधुरिमा को बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी में नौकरी मिली। यहां उनकी शुरुआती सैलरी सिर्फ 35 हजार रुपये महीना थी, यानी बैंक की नौकरी से काफी कम। फिर भी उन्होंने इसे अपने लिए बेहतर विकल्प माना, क्योंकि काम का माहौल पहले की तुलना में काफी सुविधाजनक था।
अब 60 हजार सैलरी और घर से काम
समय के साथ उनकी सैलरी फिर बढ़ी। अब मधुरिमा Senior Customer Support Executive के तौर पर काम कर रही हैं और करीब 60 हजार रुपये महीना कमाती हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि वह अब अपने पति के साथ हैदराबाद में रहती हैं और वर्क फ्रॉम होम करती हैं। यानी सरकारी बैंक की 70 हजार रुपये वाली नौकरी छोड़ने के बाद सैलरी भले कुछ कम हुई, लेकिन उनके मुताबिक काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बेहतर हुआ है। मधुरिमा की कहानी यह सवाल भी उठाती है कि करियर में सिर्फ सैलरी और नौकरी की सुरक्षा ही मायने रखती है या काम का माहौल, समय और निजी जिंदगी का संतुलन भी उतना ही जरूरी है।