'मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं था...', वीजा में देरी की वजह से अपनी मां को अंतिम विदाई नहीं दे पाए टेक प्रोफेशनल का छलका दर्द

Indian Techie Visa Story: गौतम ने बताया कि उन्होंने इमरजेंसी अपॉइंटमेंट के लिए लगातार 26 दिनों तक कोशिश की। उन्होंने दूतावास को अस्पताल के दस्तावेज भेजे, बार-बार स्लॉट चेक किए, लेकिन समय निकल गया। उन्होंने भावुक होते हुए लिखा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा पछतावा रहेगा

अपडेटेड May 03, 2026 पर 1:38 PM
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गौतम की कहानी उन लाखों प्रोफेशनल्स की हकीकत बयां करती है जो करियर और परिवार के बीच फंसे हुए हैं

H-1B Visa Delay Story: विदेश में करियर बनाने का सपना कभी-कभी कितनी भारी कीमत वसूलता है, इसका अंदाजा गौतम डे की आपबीती से लगाया जा सकता है। अमेरिका में कार्यरत एक भारतीय मूल के इंजीनियर ने लिंकडइन पर अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि कैसे वीजा नियमों और अपॉइंटमेंट में देरी की वजह से वह अपनी मां के अंतिम दर्शन नहीं कर सके। यह कहानी उन लाखों प्रोफेशनल्स की हकीकत बयां करती है जो करियर और परिवार के बीच फंसे हुए हैं।

'इंजीनियर नहीं, एक बेटे के तौर पर लिख रहा हूं'

गौतम डे ने अपनी पोस्ट की शुरुआत में ही स्पष्ट किया कि वह अपनी पेशेवर पहचान से परे एक दुखी बेटे के रूप में अपनी बात रख रहे हैं। उनकी मां को स्टेज 4 का फेफड़ों का कैंसर था और वह 17 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहीं। इस दौरान गौतम ने भारत आने के लिए वीजा स्टैम्पिंग अपॉइंटमेंट हासिल करने की हर संभव कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके।


करियर बचाने की मजबूरी ने छुड़ाया मां का साथ

H-1B वीजा नियमों की जटिलता ने गौतम के सामने एक असंभव विकल्प खड़ा कर दिया था। उन्होंने बताया कि अगर वह बिना स्टैम्पिंग अपॉइंटमेंट के भारत चले जाते, तो वह महीनों तक अमेरिका से बाहर फंस सकते थे। बिना वीजा के वापस न लौट पाने की स्थिति में उनकी नौकरी जा सकती थी और उनके परिवार का कानूनी दर्जा खत्म हो सकता था। उनकी बेटी कॉलेज में है और छोटा बेटा 10वीं कक्षा में है। अचानक अमेरिका छोड़ने से उनका पूरा जीवन उथल-पुथल हो सकता था। उन्हें अपनी मरती हुई मां के पास जाने या अपने बच्चों के भविष्य की रक्षा करने में से किसी एक को चुनना था।

26 दिनों का संघर्ष और फोन पर अंतिम विदाई

गौतम ने बताया कि उन्होंने इमरजेंसी अपॉइंटमेंट के लिए लगातार 26 दिनों तक कोशिश की। उन्होंने दूतावास को अस्पताल के दस्तावेज भेजे, बार-बार स्लॉट चेक किए, लेकिन समय उनके हाथ से फिसलता गया। अंत में वह अपनी मां को केवल फोन की स्क्रीन पर देख सके और उनकी आवाज सुन सके। उन्होंने भावुक होते हुए लिखा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा पछतावा रहेगा।

युवाओं को दी खास सलाह

अपनी आपबीती साझा करने के साथ ही गौतम ने विदेश जाने का सपना देखने वाले युवा प्रोफेशनल्स को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत में अब AI इनोवेशन, डीप टेक्नोलॉजी और बेहतरीन निवेश के अवसर मौजूद हैं। सफलता का पैमाना केवल घर छोड़कर विदेश जाना नहीं होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी प्राथमिकताओं पर गहराई से विचार करें।

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