AC कोच की बेडशीट धुलवाने पर इंडियन रेलवे कितना खर्च करता है? लॉन्ड्री बिल जानकर चौंक जाएंगे आप
Indian Railways News: अगर आपने कभी भारतीय रेलवे के AC कोच में सफर किया है, तो यात्रा के दौरान मिलने वाली सफेद चादर, तकिए का कवर और कंबल जरूर इस्तेमाल किया होगा। लाखों यात्रियों को रोजाना यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रेलवे को बड़े पैमाने पर लॉन्ड्री ऑपरेशन चलाना पड़ता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक चादर की धुलाई पर रेलवे कितना खर्च करता है?
Indian Railways News: हाल ही में सामने आए एक आधिकारिक रेलवे टेंडर ने इस सवाल का जवाब दिया है
Indian Railways News: भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है, जहां हर दिन करोड़ों यात्री सफर करते हैं। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले AC कोच यात्रियों को रेलवे की ओर से बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाती है, जिसमें बेडशीट, तकिए का कवर, तौलिया और कंबल शामिल होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर यात्रा के बाद इन चादरों और लिनेन की धुलाई पर रेलवे कितना खर्च करता होगा? हाल ही में सामने आए एक रेलवे टेंडर दस्तावेज ने इस सवाल का जवाब दिया है और यह आंकड़ा जानकर कई यात्री हैरान हैं।
रेलवे के आधिकारिक लॉन्ड्री टेंडर के मुताबिक, AC कोच में इस्तेमाल होने वाली एक बेडशीट को धोने की लागत सिर्फ 3.16 रुपये प्रति पीस है। यानी रेलवे एक चादर की सफाई पर 5 रुपये से भी कम खर्च करता है। यानी जिस चादर का इस्तेमाल हजारों यात्री रोज करते हैं, उसकी सफाई की लागत एक कप चाय की कीमत से भी कम है। यह आंकड़ा इसलिए चर्चा में है क्योंकि देश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में रोजाना हजारों बेडरोल और लाखों लिनेन आइटम्स की सफाई की जाती है।
रोजाना धुलती हैं लाखों चादरें
इंडियन रेलवे के विशाल नेटवर्क में रोजाना हजारों ट्रेनों का संचालन होता है। AC कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों को साफ-सुथरा बेडरोल उपलब्ध कराने के लिए लाखों बेडशीट, पिलो कवर और तौलियों की नियमित धुलाई की जाती है। रेलवे के लिए यह एक बड़ा लॉजिस्टिक ऑपरेशन है, जिसमें धुलाई, सुखाने, प्रेस करने और दोबारा ट्रेनों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया शामिल होती है।
कैसे इतनी कम आती है लागत?
एक्सपर्ट के अनुसार रेलवे बड़े पैमाने पर औद्योगिक लॉन्ड्री मशीनों और केंद्रीकृत धुलाई केंद्रों का उपयोग करता है। बड़ी मात्रा में एक साथ धुलाई होने के कारण प्रति बेडशीट लागत काफी कम हो जाती है।
निजी लॉन्ड्री सेवाओं में जहां एक चादर धोने का खर्च 15 से 30 रुपये या उससे अधिक हो सकता है, वहीं रेलवे बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था (Economies of Scale) का फायदा उठाकर लागत को काफी नीचे रखने में सफल रहता है।
AC कोच में यात्रियों को क्या-क्या मिलता है?
आम तौर पर AC 2 टियर, AC 3 टियर और फर्स्ट AC कैटेगरी के यात्रियों को यात्रा के दौरान बेडरोल किट दी जाती है। इसमें आमतौर पर दो बेडशीट, एक तकिए का कवर, एक तौलिया और एक कंबल शामिल होता है। कोविड-19 महामारी के दौरान कुछ समय के लिए यह सुविधा बंद कर दी गई थी। लेकिन बाद में इसे फिर शुरू कर दिया गया।
सफाई पर विशेष जोर
रेलवे का कहना है कि यात्रियों को स्वच्छ और स्वास्थ्यकर यात्रा अनुभव देने के लिए लिनेन की गुणवत्ता और सफाई पर लगातार निगरानी रखी जाती है। विभिन्न जोनों में आधुनिक मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री स्थापित की गई हैं, जहां तय मानकों के अनुसार धुलाई की जाती है।
दिलचस्प है यह आंकड़ा
3.16 रुपये प्रति बेडशीट की धुलाई लागत सुनने में भले ही छोटी लगे। लेकिन जब इसे रेलवे के रोजाना के विशाल परिचालन से जोड़कर देखा जाता है तो यह करोड़ों रुपये के वार्षिक खर्च में बदल जाती है। यही कारण है कि रेलवे के लिए लागत नियंत्रण और सफाई व्यवस्था दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
इंडियन रेलवे की यह व्यवस्था दिखाती है कि दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्कों में से एक होने के बावजूद किस तरह बड़े पैमाने पर संचालन करके लागत को नियंत्रित रखा जा सकता है।साथ ही यात्रियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
कैसे होती है इतनी बड़ी लॉन्ड्री व्यवस्था?
रेलवे के पास देशभर में दर्जनों विभागीय और BOOT (Build-Own-Operate-Transfer) मॉडल पर चलने वाली लॉन्ड्रियां हैं, जहां बड़ी मात्रा में लिनेन की धुलाई की जाती है। बेडशीट और पिलो कवर हर उपयोग के बाद धोए जाते हैं। जबकि कंबलों की धुलाई कम अंतराल पर होती है।
क्यों चर्चा में है यह आंकड़ा?
3.16 रुपये प्रति चादर की लागत ने लोगों का ध्यान इसलिए खींचा है, क्योंकि आमतौर पर निजी लॉन्ड्री सेवाओं में एक चादर धोने का खर्च इससे कई गुना अधिक होता है। रेलवे का कहना है कि बड़े पैमाने पर मशीन आधारित धुलाई और केंद्रीकृत व्यवस्था के कारण लागत कम रखी जा सकती है।