कबूतर कभी रास्ता क्यों नहीं भूलते? जवाब इतना चौंकाने वाला है कि यकीन नहीं होगा

Pigeon navigation: कबूतर अपनी बेहतरीन दिशा पहचानने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। ये दूर-दराज तक उड़कर भी बिना रास्ता भूले घर लौट आते हैं। वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इनके अंदर कौन-सा प्राकृतिक “GPS सिस्टम” काम करता है, जो इन्हें सही दिशा दिखाता है

अपडेटेड Jun 01, 2026 पर 3:28 PM
Story continues below Advertisement
Pigeon navigation: हाल ही में हुई एक रिसर्च में वैज्ञानिकों को एक बेहद अनोखा संकेत मिला।

कबूतरों को उनकी बेहतरीन दिशा पहचानने की क्षमता के लिए हमेशा से जाना जाता है। ये छोटे-से पक्षी सैकड़ों किलोमीटर दूर उड़ने के बाद भी बिना किसी गलती के अपने घर वापस लौट आते हैं, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी लंबे समय से हैरान हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर इनके अंदर ऐसा कौन-सा प्राकृतिक “GPS सिस्टम” मौजूद है, जो इन्हें हर बार सही रास्ता दिखाता है। क्या ये सूरज और सितारों की मदद लेते हैं, या फिर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को महसूस करने की कोई खास क्षमता इनके पास होती है?

इसी रहस्य को समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं। हाल ही में हुई एक नई स्टडी ने इस पहेली को और भी दिलचस्प बना दिया है, जिसमें कबूतरों की दिशा पहचानने की क्षमता से जुड़े चौंकाने वाले संकेत सामने आए हैं।

दिशा पहचानने के लिए कई तरीके अपनाते हैं पक्षी


वैज्ञानिकों के अनुसार, जानवर और पक्षी दिशा जानने के लिए अलग-अलग संकेतों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ पक्षी सितारों की मदद से रास्ता पहचानते हैं, तो कुछ पृथ्वी के चुंबकीय (मैग्नेटिक) फील्ड को कंपास की तरह इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा सूरज और पहाड़-नदियों जैसे प्राकृतिक संकेत भी उनकी मदद करते हैं।

कबूतरों की रहस्यमयी क्षमता पर नई खोज

कई सालों से वैज्ञानिक ये समझने की कोशिश कर रहे थे कि कबूतर बिना रास्ता भूले इतनी लंबी दूरी कैसे तय कर लेते हैं। पहले माना जाता था कि शायद उनकी आंखों या चोंच में मौजूद खास कोशिकाएं उन्हें दिशा बताती हैं।

चौंकाने वाला खुलासा

हाल ही में हुई एक रिसर्च में वैज्ञानिकों को एक बेहद अनोखा संकेत मिला। अध्ययन में पाया गया कि कबूतरों के लिवर में मौजूद खास इम्यून कोशिकाएं इसमें बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। ये कोशिकाएं शरीर में आयरन को प्रोसेस करती हैं और संभव है कि यही उन्हें दिशा का संकेत देती हों।

जब लिवर की कोशिकाएं हटाई गईं तो बिगड़ गया रास्ता

शोधकर्ताओं ने जब कुछ कबूतरों के शरीर से ये विशेष कोशिकाएं अस्थायी रूप से हटाईं, तो वो सही दिशा नहीं पकड़ पाए और रास्ता भटक गए। इससे यह संकेत मिला कि इन कोशिकाओं का उनके नेविगेशन सिस्टम से गहरा संबंध हो सकता है।

बादलों वाले मौसम में क्यों बढ़ता है भ्रम?

दिलचस्प बात यह है कि जब आसमान बादलों से ढका होता है, तब कबूतरों की दिशा पहचानने की क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय वो सूरज की स्थिति का भी सहारा लेते हैं, जो गायब हो जाता है।

वैज्ञानिकों के लिए अभी भी रहस्य पूरी तरह सुलझा नहीं

हालांकि यह खोज काफी रोमांचक है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी और रिसर्च की जरूरत है। हो सकता है कि कबूतर एक ही नहीं, बल्कि कई तरीकों से दिशा पहचानते हों जैसे एक मल्टी-लेयर GPS सिस्टम।

प्रकृति का अनोखा “होमिंग सिस्टम”

यह अध्ययन दिखाता है कि प्रकृति कितनी जटिल और अद्भुत है। कबूतरों की घर वापसी की ये क्षमता अभी भी पूरी तरह समझी नहीं गई है, लेकिन एक बात साफ है इनके पास दिशा पहचानने का ऐसा सिस्टम है जो इंसानी तकनीक को भी चुनौती देता है।

Viral Video: ऑनलाइन शॉपिंग से हो रही है बचत या नुकसान? कपल ने 20,000 रुपये खर्च कर निकाला पूरा हिसाब

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।