जिस देश में कभी मच्छर नहीं थे, वहां अब भनभनाहट! वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

आइसलैंड बर्फ और ठंड से ढके आइसलैंड में पहली बार मच्छरों की भनभनाहट सुनाई दी है। अब तक मच्छर-मुक्त माने जाने वाले इस देश में तीन मच्छरों की मौजूदगी ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। ये नजारा जलवायु परिवर्तन का नया संकेत माना जा रहा है, जो आइसलैंड की प्रकृति में बदलाव की आहट है

अपडेटेड Oct 24, 2025 पर 11:13 AM
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आइसलैंड का तापमान उत्तरी गोलार्ध के बाकी देशों की तुलना में चार गुना तेजी से बढ़ रहा है।

आइसलैंड जहां चारों ओर बर्फ की चादर, ठंडी हवाएं और जमी हुई झीलें ही पहचान हैं, वहां अब कुछ ऐसा हुआ है जिसने सबको चौंका दिया है। जिस देश को अब तक 'नो-मॉस्किटो लैंड' कहा जाता था, वहां पहली बार मच्छरों की भनभनाहट सुनाई दी है। जी हां, इस बर्फीले देश में अब तीन मच्छरों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है दो मादा और एक नर। ये नन्हें कीड़े भले छोटे हों, लेकिन इनका आना बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। आइसलैंड जैसे ठंडे देश में मच्छरों का दिखना किसी चमत्कार से कम नहीं, क्योंकि यहां की ठंड में अब तक कोई मच्छर जिंदा नहीं रह पाता था।

वैज्ञानिकों के लिए ये एक नई पहेली बन गई है आखिर इतने ठंडे इलाके में ये गर्म प्रदेशों के बाशिंदे कैसे पहुंच गए? ये सिर्फ एक जीव की कहानी नहीं, बल्कि बदलती धरती और बढ़ती गर्मी का संकेत भी है।

बगीचे में दिखा अजीब कीड़ा


क्जोस कस्बे के रहने वाले ब्योर्न ह्जाल्टासन नामक व्यक्ति ने अपने बगीचे में जब एक अजीब कीड़ा देखा, तो पहले तो उन्हें लगा कि ये कोई सामान्य कीड़ा है, लेकिन ध्यान से देखने पर उन्होंने पाया कि ये कुछ अलग है। बाद में जांच में पता चला कि ये मच्छर कुलिसेटा एनुलाटा प्रजाति के हैं, यानी वही प्रजाति जो ठंडी जगहों पर भी जीवित रह सकती है।

ठंड में मच्छरों का जिंदा रहना असंभव क्यों था?

आइसलैंड का मौसम हमेशा से बेहद ठंडा और कठोर रहा है। मच्छर जैसे कीड़े ठंडे खून वाले जीव होते हैं, यानी वे अपने शरीर का तापमान खुद नियंत्रित नहीं कर सकते। ऐसे में ठंडे इलाकों में उनका जीवित रहना लगभग नामुमकिन होता है। अब तक यही वजह थी कि आइसलैंड को 'नो-मॉस्किटो लैंड' कहा जाता था।

ग्लोबल वॉर्मिंग 

लेकिन अब कहानी बदल चुकी है। वैज्ञानिक मानते हैं कि आइसलैंड में मच्छरों का दिखना ग्लोबल वॉर्मिंग  का सीधा परिणाम है। पिछले कुछ वर्षों में यहां तापमान तेजी से बढ़ा है यहां तक कि रिपोर्ट्स के मुताबिक, आइसलैंड का तापमान उत्तरी गोलार्ध के बाकी देशों की तुलना में चार गुना तेजी से बढ़ रहा है।

2025 के मई महीने में यहां लगातार 10 दिनों तक तापमान 20°C से ऊपर रहा, और एग्लिस्स्तादिर एयरपोर्ट पर 26.6°C दर्ज किया गया—जो मई का अब तक का सबसे गर्म दिन था। ऐसे में मच्छरों के लिए ये जगह अब रहने और प्रजनन करने के लिए अनुकूल बन गई है।

गर्मी ने मच्छरों को दिया जोश

वैज्ञानिक बताते हैं कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, मच्छरों के जीवन चक्र की गति भी तेज हो जाती है। गर्मी में उनके अंडे जल्दी फूटते हैं, लार्वा तेजी से बढ़ता है और मादा मच्छर ज्यादा बार इंसानों को काटती हैं। 2020 की एक रिसर्च में ये भी साबित हुआ कि 10 से 35°C के तापमान और 42% से ज्यादा नमी वाला माहौल मच्छरों के लिए सबसे आरामदायक होता है। यानी गर्मी और नमी उनके लिए “परफेक्ट होम” जैसा वातावरण बनाती हैं।

अब दुनिया में मच्छर मुक्त जगह बस एक

आइसलैंड में मच्छरों की मौजूदगी का मतलब है कि अब दुनिया में केवल एक ही इलाका ऐसा बचा है, जहां मच्छर नहीं हैं—अंटार्कटिका। वहां का तापमान इतना कम होता है कि पानी भी लगभग हमेशा बर्फ में जमे रहता है। ऐसे में न तो मच्छर अंडे दे सकते हैं, न ही अपने जीवन चक्र को पूरा कर सकते हैं।

चेतावनी या बदलाव?

आइसलैंड में मच्छरों का पहुंचना केवल एक जैविक घटना नहीं, बल्कि ये जलवायु परिवर्तन का साफ संकेत है। अगर इतनी ठंडी जगहों पर भी अब गर्मी मच्छरों को पनाह देने लगी है, तो ये पृथ्वी के बदलते संतुलन की चेतावनी है। जहां कभी बर्फ के बीच केवल सील और पेंगुइन दिखाई देते थे, अब वहां भिनभिनाते मच्छर दिखना बताता है कि मौसम की दिशा किस ओर जा रही है।

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