Success Story: बिहार के IITian का कमाल! इंसानों की जगह सीवर साफ करेगा रोबोट, कॉलेज आइडिया बना 15 करोड़ का स्टार्टअप
Success Story: मैनहोल में उतरकर सफाई करने की मजबूरी अब खत्म हो सकती है! बिहार के एक IITian ने ऐसा रोबोट बना डाला है, जो इंसानों की जगह खतरनाक सेप्टिक टैंक की सफाई कर सकता है। कॉलेज के एक प्रोजेक्ट से शुरू हुई यह कहानी आज करोड़ों की स्टार्टअप तक पहुंच चुकी है और लोगों का ध्यान खींच रही है
दिव्यांशु की कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है।
भारत में सफाई का काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के लिए रोजमर्रा की ड्यूटी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। मैनहोल, सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान उन्हें कई बार ऐसे हालातों का सामना करना पड़ता है, जहां छोटी सी गलती भी जान पर भारी पड़ सकती है। जहरीली गैस, गंदगी और संक्रमण के बीच काम करने वाले इन कर्मचारियों की सुरक्षा लंबे समय से चिंता का विषय रही है। मैनुअल स्कैवेंजिंग पर कानूनी रोक के बावजूद कई जगह लोगों से जोखिम भरे तरीके से सफाई कराने की खबरें सामने आती रहती हैं। ऐसे में तकनीक एक नई उम्मीद बनकर सामने आ रही है।
इसी दिशा में IIT Madras से पढ़े बिहार के दिव्यांशु कुमार ने ऐसा रोबोट तैयार करने की पहल की, जो इंसानों को खतरनाक सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए अंदर जाने से बचा सकता है। उनकी यह कोशिश अब एक स्टार्टअप का रूप ले चुकी है।
बिहार के युवक ने खोजा तकनीकी समाधान
इसी चुनौती को बदलने की कोशिश की IIT Madras से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले बिहार के दिव्यांशु कुमार ने। कॉलेज के दौरान उन्होंने ऐसा रोबोट तैयार करने पर काम शुरू किया, जो इंसान के सेप्टिक टैंक में उतरे बिना सफाई कर सके। शुरुआत में यह सिर्फ एक कॉलेज प्रोजेक्ट था, लेकिन दिव्यांशु ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया। इसी सोच ने बाद में Solinas Integrity नाम की स्टार्टअप कंपनी का रूप लिया।
Meet Divyanshu Kumar, who completed his https://t.co/BC6fLkcQNf in Mechanical Engineering from IIT Madras. This guy from Bihar developed robots to replace humans for manhole and sewage cleaning.
दिव्यांशु ने अपने साथियों के साथ मिलकर Solinas Integrity की शुरुआत की। कंपनी का मकसद रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सैनिटेशन और भूमिगत ढांचे से जुड़े खतरनाक कामों को सुरक्षित बनाना है।
उनके इस खास इनोवेशन में HomoSEP शामिल है। यह एक रोबोटिक सिस्टम है, जिसे सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे कामों में इंसानों की सीधी एंट्री को कम करना है, जहां जहरीली गैस या दूसरे खतरों से जान जा सकती है।
खतरा इंसान के लिए है तो मशीन क्यों नहीं?
दिव्यांशु के काम के पीछे एक बेहद सरल लेकिन असरदार विचार है अगर कोई काम इंसान के लिए बहुत खतरनाक है, तो उसे मशीन से कराया जाना चाहिए। इसी सोच को उन्होंने सिर्फ सेप्टिक टैंक तक सीमित नहीं रखा। Solinas Integrity अब पाइपलाइन, सीवर और दूसरे भूमिगत इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच और रखरखाव के लिए भी रोबोटिक तकनीक विकसित कर रही है।
15 करोड़ रुपये तक पहुंची स्टार्टअप की वैल्यू
एक कॉलेज प्रोजेक्ट से शुरू हुई यह पहल अब करीब 15 करोड़ रुपये की वैल्यू वाली स्टार्टअप बन चुकी है। यानी जिस विचार की शुरुआत एक छात्र ने पढ़ाई के दौरान की थी, वह अब एक वास्तविक बिजनेस और सामाजिक समाधान में बदल चुका है।
Forbes India 30 Under 30 में मिली जगह
दिव्यांशु कुमार के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। 2025 में उन्हें Forbes India 30 Under 30 सूची में जगह दी गई। उन्हें खास तौर पर मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी खतरनाक समस्या से निपटने के लिए रोबोटिक समाधान विकसित करने के काम के लिए पहचान मिली।
सोशल मीडिया पर भी हो रही तारीफ
दिव्यांशु की कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है। कई यूजर्स ने इसे ऐसी IIT कहानी बताया जिसमें तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ करियर बनाने के लिए नहीं, बल्कि जानलेवा काम को सुरक्षित बनाने के लिए किया गया। एक यूजर ने इसे “रोबोट से जानलेवा मैनुअल स्कैवेंजिंग को बदलने वाली प्रेरणादायक IIT कहानी” बताया। वहीं, अन्य लोगों ने उनके प्रयास को वास्तविक समस्या का तकनीकी समाधान खोजने और समाज में बदलाव लाने की मिसाल बताया।
इंजीनियरिंग का असली मतलब दिखाती है यह कहानी
दिव्यांशु कुमार की यात्रा बताती है कि इंजीनियरिंग सिर्फ नई मशीन या टेक्नोलॉजी बनाने तक सीमित नहीं है। सही सोच और उद्देश्य के साथ तकनीक किसी ऐसी समस्या को भी चुनौती दे सकती है, जो दशकों से समाज का हिस्सा बनी हुई है।