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Indian Railways: ट्रेन चलती है एक ही तार से, फिर भी तार क्यों नहीं होता खराब? जानिए पूरा सच!

Indian Railways Facts: रोजाना लाखों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं। इलेक्ट्रिक ट्रेनों के ऊपर ओवरहेड वायर और इंजन पर पेंटोग्राफ लगा होता है, जो लगातार उस तार से जुड़ा रहता है। इसी से बिजली इंजन तक पहुंचती है और ट्रेन चलती है। लेकिन क्या आपने सोचा है, इतनी बड़ी ट्रेन सिर्फ एक तार से कैसे दौड़ती है?

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 12, 2025 पर 12:43 PM
Indian Railways: ट्रेन चलती है एक ही तार से, फिर भी तार क्यों नहीं होता खराब? जानिए पूरा सच!
Indian Railways Facts: डीजल लोकोमोटिव में बिजली इंजन के अंदर की बनाई जाती है। जबकि इलेक्ट्रिक इंजन को बिजली ओवरहेड वायर से मिलती है।

ट्रेन यात्रा के दौरान हमारी नजरें अक्सर पटरियों के किनारे के नजारों पर टिकी रहती हैं—कभी स्टेशन, कभी सिग्नल, तो कभी गांव-शहर के दृश्य। लेकिन शायद ही हम ऊपर लटकी उस पतली-सी तार पर ध्यान देते हैं, जो असल में पूरी ट्रेन को ताकत देती है। इस तार को ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर कहा जाता है, और इंजन के ऊपर लगा पेंटोग्राफ लगातार इससे जुड़ा रहता है। यही कनेक्शन ट्रेन को बिजली सप्लाई करता है, जिससे वह घंटों और हजारों किलोमीटर तक दौड़ पाती है। सोचने वाली बात यह है कि इतनी तेज रफ्तार, लगातार घर्षण और मौसम के असर के बावजूद यह तार जल्दी घिसती या टूटती क्यों नहीं। इसके पीछे छिपा है खास तकनीक और मटेरियल का कमाल, जो इसे बेहद मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित बनाता है।

कॉपर का कमाल

पटरियों के ऊपर जो ओवरहेड वायर (OHE) लगाई जाती है, वो साधारण तार नहीं होती। ये बेहद मजबूत कॉपर से बनी होती है, जो बिजली को आसानी से और तेजी से ट्रांसफर करती है। कॉपर की ये मजबूती और कंडक्टिविटी ही इसे ट्रेन के लंबे सफर में टिकाऊ बनाती है।

पेंटोग्राफ

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