पुणे में हुई एक युवक की मौत का मामला हर दिन नए खुलासों के साथ और रहस्यमय होता जा रहा है। शुरुआत में इसे एक सामान्य हादसा माना गया था, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। जांच एजेंसियां अब कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और आरोपियों की गतिविधियों को जोड़कर घटनाक्रम की कड़ियां तलाश रही हैं। इस केस में सामने आई नई जानकारियों ने लोगों के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं और मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
शादी टालने की थी कथित योजना
पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि इस मामले का मकसद आर्थिक लाभ या पारिवारिक विवाद नहीं था। जांच एजेंसियों का दावा है कि सिया गोयल कथित तौर पर यह शादी नहीं करना चाहती थीं। पुलिस का आरोप है कि उन्हें लगता था कि केतन की मौत के बाद परिवार उन पर दोबारा शादी का दबाव कई साल तक नहीं डालेगा।
पुराने रिश्ते की भी हो रही जांच
जांच में यह भी सामने आया है कि सह-आरोपी चेतन चौधरी और सिया गोयल की जान-पहचान सगाई से पहले की थी। पुलिस के अनुसार, दोनों जनवरी में दोस्तों के साथ उदयपुर घूमने गए थे और करीब पांच दिन साथ रहे। इसके कुछ सप्ताह बाद फरवरी में सिया की केतन से सगाई हुई थी।
पुलिस का कहना है कि चेतन पहले से सिया के परिवार को जानता था। उसकी पहचान सिया के बड़े भाई साहिल गोयल से क्रिकेट के जरिए हुई थी। बाद में सिया और चेतन के बीच फिर से संपर्क बढ़ा।
2,004 फोन कॉल्स ने बढ़ाया शक
जांच अधिकारियों के अनुसार, जनवरी से अब तक सिया और चेतन के बीच 2,004 बार फोन पर बातचीत हुई। दोनों ने कुल 238 घंटे तक एक-दूसरे से बात की। पुलिस इन कॉल रिकॉर्ड्स को कथित साजिश के अहम सबूत के तौर पर जांच रही है।
घटना से एक दिन पहले हुई मुलाकात
पुलिस के मुताबिक, 17 जून को, यानी घटना से एक दिन पहले, दोनों पुणे के लुल्लानगर इलाके के एक कैफे में करीब एक घंटे तक मिले थे। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इसी मुलाकात में कथित योजना पर चर्चा हुई थी।
डिलीट किए गए चैट और मैसेज खंगाल रही पुलिस
जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल से कथित तौर पर WhatsApp चैट, Instagram मैसेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट कर दिए थे। पुलिस अब फॉरेंसिक जांच के जरिए हटाए गए डेटा को रिकवर कर रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सके।
डिजिटल सबूतों पर टिकी जांच
फिलहाल पुलिस की जांच डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा पर केंद्रित है। अधिकारियों का मानना है कि इन सबूतों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना महज हादसा थी या इसके पीछे पहले से कोई कथित साजिश रची गई थी।