बेंगलुरु के कुशल रेड्डी और चाहक जैन की बिजनेस कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है। दोनों ने कारोबार शुरू करने का सपना देखा और करीब ₹4 लाख लगाकर क्लाउड किचन की शुरुआत की, लेकिन उम्मीद के मुताबिक बिजनेस नहीं चल पाया। डिलीवरी प्लेटफॉर्म की भारी कमीशन फीस, विज्ञापन का खर्च और सीधे ग्राहकों से कम ऑर्डर मिलने जैसी परेशानियों ने उनका कारोबार मुश्किल में डाल दिया। आखिरकार उन्हें अपना पहला बिजनेस बंद करना पड़ा। आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोग हार मान लेते हैं, लेकिन कुशल और चाहक ने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने अपनी गलतियों से सीख ली और एक नए बिजनेस मॉडल के साथ दोबारा मैदान में उतरने का फैसला किया। इस बार दोनों ने फूड ट्रक शुरू किया और लॉन्च से पहले ही सोशल मीडिया के जरिए लोगों से जुड़ना शुरू कर दिया। आगे की कहानी उनकी इसी दूसरी कोशिश की है।
हार मानने के बजाय निकाला नया रास्ता
पहली कोशिश के फेल होने के बाद दोनों ने कारोबार छोड़ने के बजाय अपनी रणनीति बदलने का फैसला किया। इस बार उन्होंने ऐसा बिजनेस मॉडल चुना, जिसमें ग्राहकों तक सीधे पहुंच बनाई जा सके। दोनों ने बेंगलुरु में Kried नाम से फ्राइड-चिकन बर्गर फूड ट्रक शुरू किया।
फूड ट्रक शुरू होने से पहले ही बना लिया ग्राहक बेस
इस बार उनकी सबसे बड़ी रणनीति सिर्फ खाना बेचना नहीं, बल्कि लोगों को अपनी कहानी से जोड़ना थी। चाहक ने इंस्टाग्राम पर फूड ट्रक तैयार करने से लेकर लॉन्च की तैयारी तक का सफर लगातार शेयर किया। इसका फायदा यह हुआ कि फूड ट्रक शुरू होने से पहले ही उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर 5,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए थे। यानी पहली बार जहां उन्हें ग्राहकों तक पहुंचने में परेशानी हुई थी, वहीं दूसरी कोशिश में ग्राहक उनके बिजनेस के लॉन्च का इंतजार कर रहे थे।
पहले दिन ही पहुंच गए 100 से ज्यादा ग्राहक
जब Kried ने पहली बार अपने दरवाजे ग्राहकों के लिए खोले, तो पहले ही दिन 100 से ज्यादा लोग बर्गर खाने पहुंचे। इसके बाद कारोबार ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी।
रिपोर्ट के मुताबिक, फूड ट्रक अब एक दिन में करीब 350 से 450 ग्राहकों को सर्व करता है और रोजाना लगभग ₹1 लाख की बिक्री दर्ज करता है।
₹4 लाख से ₹2 करोड़ तक पहुंचा कारोबार
सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों की दूसरी कोशिश ने महज 10 महीनों में करीब ₹2 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया। यानी जिस बिजनेस सफर की शुरुआत ₹4 लाख के निवेश वाले असफल क्लाउड किचन से हुई थी, वही सफर एक सफल फूड ट्रक बिजनेस तक पहुंच गया। हालांकि, यह आंकड़ा रिपोर्टेड रेवेन्यू है, इसे सीधे मुनाफे के तौर पर नहीं समझना चाहिए।
सोशल मीडिया पर लोग कर रहे हैं तारीफ
कुशल और चाहक की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई यूजर्स ने उनकी असफलता से सीख लेकर दोबारा शुरुआत करने की हिम्मत की तारीफ की। एक यूजर ने उनकी कहानी को बिजनेस में दोबारा कोशिश करने की शानदार मिसाल बताया। वहीं एक अन्य यूजर ने रोजाना 400 के आसपास ग्राहकों के आंकड़े पर हैरानी जताई। एक यूजर ने लिखा कि दोनों ने पहले असफलता का सामना किया, उससे सीखा और फिर दोबारा शुरुआत करके शानदार सफलता हासिल की।
असफलता के बाद दोबारा शुरुआत बनी असली कामयाबी
कुशल और चाहक की कहानी सिर्फ ₹2 करोड़ के रेवेन्यू की वजह से चर्चा में नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दोनों ने पहली असफलता के बाद हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी गलतियों को समझा, बिजनेस मॉडल बदला और इस बार सोशल मीडिया को अपनी मार्केटिंग का अहम हिस्सा बनाया।