Life Insurance Policy Mis-selling: महाराष्ट्र के नागपुर में रहने वाले एक 90 वर्षीय शख्स वेंकटचलम वी अय्यर के साथ वर्ष 2124 में मेच्योर होने वाली लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम को लेकर धोखाधड़ी का एक अनोखा मामला सामने आया है। आरोपों के मुताबिक केनरा बैंक (Canara Bank) की एक ब्रांच के मैनेजर ने उन्हें सालाना ₹2 लाख प्रीमियम वाली पॉलिसी बेच दी। इस मामले को जब X (पूर्व नाम Twitter) पर साकेत आर नाम के यूजर ने पोस्ट किया तो इसने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है। इस घटना ने बैंक के जरिए बेचे जाने वाली इंश्योरेंस पॉलिसी में मिस-सेलिंग, नैतिकता में चूक और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केनरा बैंक ने इस मामले में साकेत की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है कि वह इस मामले को अपनी एक टीम के पास भेज रहे हैं लेकिन बैंक ने पब्लिक कमेंट में मिस-सेलिंग को लेकर कोई कमेंट नहीं किया है।
साकेत आर का कहना है कि उनकी पत्नी के दादा यानी वेंकटचलम वी का दशकों से केनरा बैंक की उस ब्रांच में खाता रहा है, जहां उन्हें गलत तरीके से लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेची गई। दावे के मुताबिक पिछले साल फरवरी में इस पॉलिसी को आखिरी रूप दिया गया और उनके बचत खासे से पहले ₹2 लाख काट लिए गए थे। मामला तब सामने आया जब उन्हें अगले प्रीमियम को लेकर बैंक से एक अलर्ट मिला, जिससे वे घबरा गए और उन्होंने अपने परिवार को इसकी जानकारी दी। साकेत के मुताबिक 90 वर्षीय वेंकटचलम ने अपने ब्रांच मैनेजर पर भरोसा किया जिसका दुरुपयोग किया गया।
अपने ट्वीट में साकेत ने कहा कि यह पॉलिसी तत्काल और बहुत जरूरी बताकर बेची गई थी जिसे वेंकटचलम पर सहमति देने का दबाव बना। उम्र और वित्तीय जानकारी के अभाव में, चूंकि वह मैनेजर पर भरोसा करते थे तो उन्होंने बिना सही तरह से समझे इस पॉलिसी के लिए सहमति दे दी। साकेत का कहना है कि 90 साल की उम्र में मैनेजर ने उन्हें ₹2 लाख सालाना प्रीमियम वाली जीवन बीमा पॉलिसी बेच दी और दो वर्षों में खाते से हर साल ₹2 लाख काटे गए, यानी कुल ₹4 लाख का प्रीमियम वसूला गया जो वेंकटचलम की जीवनभर की बचत का एक बड़ा हिस्सा है।
नियमों के साथ भी हुआ खिलवाड़?
साकेत का आरोप है कि लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स से जुड़े अधिकतम उम्र के नियमों से बचने के लिए बैंक ने बैकडोर अपनाया गया। उनका दावा है कि बैंक मैनेजर ने पहले बुज़ुर्ग व्यक्ति को उनकी अधिक उम्र का हवाला देते हुए अपनी बेटी के साथ एक ज्वाइंट अकाउंट खोलने की सलाह दी थी और बाद में जीवन बीमा पॉलिसी में बेटी को “लाइफ एश्योर्ड” दिखाया गया, जबकि 90 वर्षीय शख्स प्राइमरी अकाउंटहोल्डर बना रहा और उसी के पैसे से प्रीमियम का पेमेंट किया गया। साकेत के मुताबिक वेंकटचलम इतनी उम्र के हो चुके हैं कि वह कायदे से लिख भी नहीं सकते। बैंक वालों ने खुद फॉर्म भरा और वेंकटचलम से सिर्फ साइन करवाया गया क्योंकि वह प्राइमरी अकाउंटहोल्डर थे। साकेत का कहना है कि यह सब केवल केवल बिक्री लक्ष्य पूरे करने के लिए किया गया दिख रहा है, जिसमें बुज़ुर्ग ग्राहक की वित्तीय भलाई की कोई चिंता नहीं की गई और उनकी जिंदगी के अंतिम वर्षों में उन्हें अनावश्यक तौर पर वित्तीय तनाव दिया गया।
साकेत के पोस्ट पर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स काफी सलाह दे रहे हैं। उन्होंने पॉलिसी की डिटेल्स साझा की है जिसमें वर्ष 2124 में मेच्योरिटी ने यूजर्स को चौंका दिया है। कुछ यूजर्स ने एंट्री के समय उम्र से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। एक यूजर ने तो पॉलिसीबाजार का स्क्रीन शॉट डाला और कहा कि 90 साल के व्यक्ति को यह कैसे बेची जा सकती है? उन्होंने कहा कि इससे रिफंड का मामला, संभवतः जुर्माने के साथ, और मजबूत हो सकता है। एक यूजर ने बैंक और बीमा कंपनी, दोनों के पास शिकायत करने को कहा है और अगर 30 दिनों में मामला नहीं सुलझता है तो आरबीआई और इरडा के पास शिकायत करने को कहा है।