डायनासोर और छिपकली – एक नाम सुनते ही दहशत और रोमांच से भरा विशालकाय जीव याद आता है, वहीं दूसरा हमारे घरों की दीवारों पर दौड़ने वाला छोटा-सा रिप्टाइल्स । दोनों के आकार और रूप में जमीन-आसमान का अंतर है, लेकिन अक्सर दिमाग में सवाल आता है कि क्या ये दोनों आपस में जुड़े हुए हैं? क्या जो छिपकली आज हमारे आसपास घूमती नजर आती है, वह कभी पृथ्वी पर राज करने वाले डायनासोरों की कोई दूर की रिश्तेदार रही होगी? विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह सवाल बेहद रोमांचक है।
दोनों जीवों की बनावट और विकास के इतिहास पर नजर डालें तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं, जिनसे पता चलता है कि कुछ लाख या करोड़ों साल पहले इन दोनों के पूर्वजों की जड़ें कहीं न कहीं एक ही परिवार से जुड़ी थीं। आइए इस रहस्य को थोड़ा और करीब से समझने की कोशिश करते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि डायनासोर और छिपकली दोनों ही आर्कोसॉर नामक समूह से संबंधित हैं, जिसमें सरीसृप और पक्षी भी शामिल होते हैं। डायनासोर भले ही 6.6 करोड़ साल पहले खत्म हो गए हों, लेकिन उनके डीएनए की कुछ झलक आज की छिपकलियों में अब भी मौजूद है। यही वजह है कि कई जीव वैज्ञानिक छिपकली को ‘डायनासोर की दूर की रिश्तेदार’ मानते हैं।
बनावट में मिलती-जुलती खूबियां
छिपकली और डायनासोर दोनों की बनावट में कई समानताएं देखी जाती हैं लंबा शरीर, चार पैर, पूंछ और सरीसृप जैसे शारीरिक स्ट्रक्चर। कुछ छिपकलियां तो देखने में कुछ-कुछ छोटे डायनासोर जैसी लगती हैं। हालांकि डायनासोर का आकार बहुत बड़ा होता था और वजन ज्यादा होने की वजह से उन्हें ज्यादा भोजन और पानी की जरूरत पड़ती थी।
छिपकलियां छोटी क्यों रह गईं?
जब पृथ्वी पर जीवन विकसित हो रहा था तब भोजन और जगह की कोई कमी नहीं थी, इसलिए जीव आकार में बड़े होते चले गए। लेकिन जैसे-जैसे वातावरण बदला और भोजन के लिए जीवों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी, वैसे-वैसे कुछ जीव छोटे आकार में ढलने लगे ताकि कम जगह और भोजन में भी वे जी सकें। छिपकलियों ने खुद को इसी तरह अनुकूलित किया, इसलिए ये आकार में छोटी रह गईं और बदलती प्रकृति में आसानी से टिक गईं; जबकि बड़े और भारी डायनासोर जीवन की इस दौड़ में पिछड़ गए।