Lohri 2026: हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व, जानिए इसका इतिहास और महत्व

Lohri 2026: लोहड़ी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर साल ये पर्व 13 जनवरी के दिन मनाया जाता है। इसमें लोग गाते हैं, ढोल पर नाचते हैं और आग के चारों ओर फेरी लगाते हैं। यह त्योहार मुख्य रूप से पंजाब, हरियाण और दिल्ली में मनाया जाता है। आइए जानें इसका इतिहास और महत्व

अपडेटेड Jan 06, 2026 पर 6:11 PM
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लोहड़ी मूल रूप से सूर्य के उत्तरायण होने से पहले की आखिरी रात का प्रतीक है।

Lohri 2026: जनवरी के महीने में जब कड़ाके की ठंड से पूरा उत्तर भारत ठिठुर रहा होता है, उसके बीच में आता है लोहड़ी का त्योहार। लोहड़ी अपने साथ फसलों के नए मौसम का संदेश लेकर आती है। ढोल की थाप और लोकगीतों की सुरीली धुनों के साथ जलती आग ठंड के मौसम में त्योहारों की गर्माहट जगाती है। ये त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाण और दिल्ली में मनाया जाता है। हर साल 13 जनवरी के दिन लोग अपने परिवारों, मित्रों और नाते-रिश्तेदारों के साथ जुटते हैं। आग के चारों ओर फेरी लगाते हैं। नाचते-गाते हैं, आग में मूंगफली, मक्का और रेवड़ी डालते हैं और फेरी लगाते हैं। लोहड़ी समुदाय और फसल का उत्सव है। यह परिवारों और दोस्तों के एक साथ आने, उपहारों का आदान-प्रदान करने और रिश्तों को मजबूत करने का समय है।

लोहड़ी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, इस साल लोहड़ी मंगलवार, 13 जनवरी को मनाई जाएगी। लोहड़ी संक्रांति का मुहूर्त – दोपहर 03:13 बजे से 14 जनवरी तक रहेगा। इसके अगले दिन मकर संक्रांति बुधवार, 14 जनवरी, 2026 को मनाई जाएगी।

सूर्य के उत्तरायण होने से पहले की आखिरी रात

लोहड़ी मूल रूप से सूर्य के उत्तरायण होने से पहले की आखिरी रात का प्रतीक है। यह पर्व सूर्य, अग्नि और फसल से जुड़ा पर्व है।

कृषि पर्व है लोहड़ी


लोहड़ी के पर्व को भले किसी एक समुदाय से जोड़ा जाए, लेकिन से एक कृषि पर्व है। इसी समय गेहूं की फसल पक कर तैयार हो जाती है। इसी खुशी में लोग आग के चारों ओर परिक्रमा कर तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ी अर्पित कर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव दर्शाता है।

लोहड़ी पर्व का महत्व

लोहड़ी का त्योहार पर्व दिन लंबे होने की शुरुआत का भी प्रतीक होता है। यह वह समय है, जब किसान अपनी अच्छी फसल के लिए प्रकृति को धन्यवाद देते हैं और जश्न मनाते हैं। इस पर्व के साथ ही आने वाले साल में खुशहाली के लिए प्रार्थना भी की जाती है। लोहड़ी के विशेष अवसर पर लोग आंगन या खुले चौक में पारंपरिक रूप से अलाव जलाते हैं और भांगड़ा व गिद्दा जैसे पारंपरिक नृत्य करते हैं। आभार के प्रतीक के रूप में आग में अनाज, मिठाइयां, मूंगफली, पॉपकॉर्न जैसी चीजें चढ़ाई जाती हैं। इस दिन सरसों का साग, मक्के की रोटी, गजक और रेवड़ी जैसे पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया जाता है।

लोहड़ी से जुड़ी कहानी

लोहड़ी को लेकर मशहूर लोक नायक दुल्ला भट्टी की कहानी अपनी बहादुरी के लिए प्रसिद्ध है। लोहड़ी के पारंपरिक गीतों में भी दुल्ला भट्टी का जिक्र आता है। इस कहानी के अनुसार, एक समय में मुगल राजा अकबर के काल में दुल्ला भट्टी नामक एक लुटेरा पंजाब में रहता था। वह धनी लोगों को लूटकर उनसे मिले सभी धन को गरीब की मदद में लगा देता था। दुल्ला भट्टी पंजाब के रॉबिन हुड नाम से भी प्रसिद्ध है।

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