सोचिए, अगर भगवान गणेश का भी कोई Resume होता तो उसमें क्या-क्या लिखा होता? शायद सबसे ऊपर उनकी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर बुद्धि और ज्ञान का जिक्र होता। मुश्किल परिस्थितियों में रास्ता निकालने की क्षमता, नेतृत्व, धैर्य और विवेक जैसी खूबियां उनकी ‘स्किल्स’ में शामिल होतीं। और अगर बात पसंदीदा चीजों की आती, तो मोदक का नाम सबसे ऊपर होना तय है।
गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान गणेश के इन्हीं गुणों को एक रचनात्मक Resume के जरिए समझने की कोशिश की गई है। बप्पा के भक्तों के लिए उनका स्वरूप सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि वे बुद्धि, शुभता, समृद्धि और नई शुरुआत के प्रतीक भी माने जाते हैं।
आज घर-घर होगा बप्पा का स्वागत
सोमवार, 14 सितंबर 2026 को देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। इस खास मौके पर भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा को घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित कर उनका स्वागत करते हैं। कई जगह बप्पा की भव्य झांकियां और पंडाल सजाए जाते हैं, वहीं घरों में परिवार के लोग मिलकर पूजा की तैयारियां करते हैं। गणपति स्थापना के बाद पूजा, आरती और प्रसाद का दौर शुरू होता है। भक्त भगवान गणेश को फूल, दूर्वा घास, मिठाइयां और विशेष रूप से मोदक अर्पित करते हैं।
क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?
गणेश चतुर्थी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। यही वजह है कि इस दिन को गणपति बप्पा के आगमन के पर्व के तौर पर बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर में गणेश प्रतिमा लाकर विधि-विधान से गणपति स्थापना की जाती है। इसके बाद भक्त बप्पा की आरती करते हैं और उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाते हैं।
बप्पा के आने से पहले घर में होती है खास तैयारी
गणेश चतुर्थी कई परिवारों के लिए भावनाओं से जुड़ा त्योहार है। बप्पा के स्वागत से पहले घर की सफाई की जाती है और पूजा के लिए एक विशेष स्थान तैयार किया जाता है। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा चुनी जाती है और पूजा की जरूरी सामग्री जुटाई जाती है। कई परिवार अपने घर को फूलों और सजावटी सामान से सजाते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई बप्पा के स्वागत की तैयारियों में उत्साह से शामिल होता है।
चतुर्थी पर चांद देखने की क्यों है मनाही?
गणेश चतुर्थी से जुड़ी एक खास धार्मिक मान्यता चंद्र दर्शन को लेकर भी है। मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि के निर्धारित समय में चांद देखने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान चंद्रमा को देखने से मिथ्या दोष या मिथ्या कलंक लग सकता है। धार्मिक मान्यता में मिथ्या कलंक का संबंध झूठे आरोप या बिना गलती के बदनामी से जोड़ा जाता है। इसलिए कई श्रद्धालु इस अवधि में चंद्र दर्शन से बचते हैं।
2026 में कब तक चांद देखने से बचें?
गणेश चतुर्थी 2026 के लिए चंद्र दर्शन से बचने का निर्धारित समय सुबह 9:01 बजे से रात 8:08 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं को मानने वाले श्रद्धालु इस अवधि के दौरान चंद्रमा देखने से परहेज करते हैं।
बप्पा का Resume सबसे खास क्यों होगा?
अगर सच में भगवान गणेश का Resume बनाया जाए तो उसमें डिग्री या नौकरी के अनुभव से ज्यादा उनके गुणों की लंबी सूची होगी। बुद्धि, विवेक, धैर्य, नेतृत्व और बाधाओं को दूर करने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी खूबियां होंगी। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी सिर्फ बप्पा के स्वागत का पर्व नहीं, बल्कि उनसे प्रेरणा लेने का भी अवसर है। घर में गणपति का आगमन कई परिवारों के लिए नई उम्मीद, सकारात्मकता और शुभ शुरुआत का प्रतीक बन जाता है।