158 साल बाद देश में दिखा यह दुर्लभ फूल; चीन, नेपाल और भूटान की लीग में शामिल

ऊपरी हिमालय में एक ऐसा फूल मिला है, जो भूटान, नेपाल और चीन में तो है लेकिन देश में करीब 158 साल बाद दिखा है। रिसर्चर्स ने इस साइनैंथस हूकेरी (Cyananthus hookeri) लुप्तप्राय की कैटेगरी में रखने की सिफारिश की है। जानिए यह फूल दिखता कैसा है, यह खोज कितनी अहम है और अब आगे क्या होना है

अपडेटेड Jul 12, 2026 पर 11:22 AM
साइनैंथस हूकेरी (Cyananthus Hookeri) कैंपैनुलेसी (Campanulaceae) यानी बेलफ्लॉवर (Bellflower) फैमिली का सदस्य है। (Image: J.D.Hooker, Fl. Brit. India 3: 435 (1881))

करीब 158 वर्षों बाद एक अत्यंत दुर्लभ हिमालयी फूल साइनैंथस हूकेरी (Cyananthus Hookeri) देश में दोबारा मिला है। इससे पहले आखिरी बार भारत में इसका रिकॉर्ड आधिकारिक तौर पर सिक्किम में 1867 में मिलता है और इस बार यह पौधा अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में मिला है। यह पौधा पूर्वा हिमालय में लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर घास वाली और पथरीली अल्पाइन ढलान पर मिला है। इसके मिलने से यह तो तय हो गया कि यह पौधा अब भी भारत में मौजूद है। इसने देश की ऊंची जगहों पर बॉयो-डाईवर्सिटी को लेकर ध्यान खींचा है और इस बेहतर दुर्लभ पौधे को बचाने की मांग फिर तेज कर दी है।

कैसा दिखता है यह फूल

साइनैंथस हूकेरी के फूल पर्पल-ब्लू रंग के होते हैं और यह कैंपैनुलेसी (Campanulaceae) यानी बेलफ्लॉवर (Bellflower) फैमिली का सदस्य है। यह प्रजाति भारत में करीब 158 साल बाद फिर दिखा है लेकिन भूटान, नेपाल और चीन के कुछ हिस्सों में भी पाई जाती है। ऐसे में अब भारत में भी मिलने पर इसने देश के बॉटनिकल हिस्ट्री में अहम जगह भरी है।


कितनी अहम है यह खोज और अब आगे क्या

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि साइनैंथस हूकेरी की दोबारा खोज ऊंचे हिमालयी इलाकों के इकोलॉजिकल महत्व को दिखाती है, जहां कठिन माहौल और सीमित बॉटनिकल सर्वे के बावजूद कई दुर्लभ पौधों की प्रजातियां बची हुई हैं। ऐसे इलाकों में अक्सर खास तरह की वनस्पतियां पनपती हैं जो कठोर मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों के हिसाब से ढल चुकी होती हैं। अब 158 साल बाद साइनैंथस हूकेरी मिला है तो रिसर्चर्स का कहना है कि रिकॉर्ड के हिसाब से दुर्लभ माने जा चुके कई हिमालयी प्रजातियां अभी भी कुछ इलाकों में मौजूद हो सकती हैं, जिनकी खोजबीन करने की जरूरत है। इस पौधे को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के मानकों के तहत भारत में 'लुप्तप्राय' यानी एनडैंजर्ड की कैटेगरी में रखने की सिफारिश की गई है।

कंवर्जेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो पौधे हिमालयी इलाकों में बचे हुए हैं, उनकी पहचान करना तो सिर्फ पहला कदम है। इनके फैलाव को समझने और जंगल में इसके बचे रहने को पक्का करने के लिए विस्तार से इकोलॉजिकल स्टडी, पॉपुलेशन एसेसमेंट और इसके परिवेश की निगरानी जरूरी होगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन इलाकों को बचाना उन दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है जो पीढ़ियों से अलग-थलग और ज्यादा ऊंचाई वाले माहौल में बची हुई हैं।

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