सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को बेहतर बनाने और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए बुकिंग के बीच निश्चित समय-सीमा तय की थी। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन के बाद ही अगली बुकिंग की अनुमति है, ताकि हर उपभोक्ता को समय पर गैस मिल सके। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। कई जगहों पर लोगों को तय समय से ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।
बुकिंग और डिलीवरी के बीच बढ़ती दूरी ने उपभोक्ताओं की परेशानी को और बढ़ा दिया है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि नियमों के बावजूद लोगों को राहत क्यों नहीं मिल पा रही है और व्यवस्था कहां कमजोर पड़ रही है।
बुकिंग नहीं, डिलीवरी डेट से गिनती!
सबसे बड़ी समस्या यह है कि गैस कंपनियां अगली बुकिंग की तारीख, बुकिंग के दिन से नहीं बल्कि सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख से जोड़ रही हैं। कई शहरों में सिलेंडर 7 से 10 दिन बाद मिलता है, जिससे अगली बुकिंग भी उतनी ही देरी से संभव हो पाती है। इसका असर यह है कि 25 दिन का गैप 35 दिन और 45 दिन का गैप 55 दिन तक खिंच रहा है।
उत्तर प्रदेश के कई शहरों—रायबरेली, बस्ती, कानपुर और प्रयागराज—से सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। लोगों को बुकिंग के बाद 7-8 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे घरों में खाना बनाना तक मुश्किल हो रहा है।
शादी के सीजन में बढ़ी मांग
शादी-ब्याह के चलते कॉमर्शियल सिलेंडर की मांग अचानक बढ़ गई है। प्रयागराज में इसकी कीमत 4,600 रुपये तक पहुंच गई है, जिसमें सिक्योरिटी अमाउंट भी शामिल है। कई लोगों को एक साथ कई सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन सप्लाई सीमित होने के कारण दिक्कतें और बढ़ रही हैं।
प्रयागराज में हजारों लोगों ने सिलेंडर के लिए आवेदन किया है, लेकिन हर किसी को जरूरत के अनुसार सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। जिला आपूर्ति विभाग के अनुसार, एक व्यक्ति को सीमित संख्या में ही कॉमर्शियल सिलेंडर दिए जा रहे हैं।
बिहार में एलपीजी की कमी के चलते सरकार ने राशन दुकानों पर कोयला उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। पटना में लाखों घरेलू सिलेंडर की बुकिंग लंबित है। ऐसे में लोगों को वैकल्पिक ईंधन की ओर रुख करना पड़ रहा है।
एमपी में गर्मी और गुस्सा दोनों
मध्य प्रदेश के भोपाल में लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। तेज गर्मी में कई लोगों की तबीयत खराब हो गई। वहीं मैहर में सिलेंडर की कमी से नाराज लोगों ने सड़क जाम कर विरोध भी जताया।
राजस्थान में कॉमर्शियल सिलेंडर पाने के लिए अब शादी का कार्ड लगाना जरूरी कर दिया गया है। प्रशासन ने यहां तक सुझाव दिया है कि जरूरत पड़ने पर लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
सिलेंडर की देरी और कमी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। नियमों के बावजूद सप्लाई में हो रही देरी से घरों से लेकर शादियों तक हर जगह असर दिख रहा है। अब जरूरत है कि सिस्टम में सुधार हो, ताकि लोगों को समय पर राहत मिल सके।