Makar Sankranti date 2026: कब है मकर संक्रांति, 14 या 15 जनवरी? जानें इस दिन दही चूड़ा खाने की परंपरा क्यों है खास?

Makar Sankranti date 2026: भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान का बहुत महत्व है। मकर संक्रांति के पर्व पर कुछ जगहों पर दही-चूड़ा खाने की परंपरा है। आइए जानें इस दिन क्या खाया जाता है दही-चूड़ा और इसके क्या हैं फायदे

अपडेटेड Jan 10, 2026 पर 10:00 PM
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सूर्य के देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु से मकर राशि में प्रवेश पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।

Makar Sankranti date 2026: भगवान सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। ग्रहों राजा सूर्य किसी भी राशि में एक माह तक विराजमान रहने के बाद राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्य के देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु से मकर राशि में प्रवेश पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। धनु राशि में सूर्य के प्रवेश पर खरमास लगता है और मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। वहीं, मकर संक्रांति पर जब सूर्य इस राशि से निकलते हैं, तब खरमास समाप्त हो जाता है और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। इस दिन को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के साथ मनाया जाता है। कहीं, इस दिन पतंगों का उत्सव होता है, तो कहीं पोंगल का पर्व मनाया जाता है। इसी दिन कुछ जगहों पर खिचड़ी पर्व भी मनाया जाता है और कुछ जगहों पर तो मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाने की परंपरा है। आइए जानें इस दिन दही चूड़ा खाने की इस परंपरा का क्या फायदा है और महत्व क्या है?

मकर संक्रांति की तारीख

पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का त्योहार इसी दिन ही मनाना उचित माना जाएगा। इस पर्व का महापुण्य काल दोपहर तीन बजकर 7 मिनट से शाम 6 बजे तक रहेगा।

मकर संक्रांति पर दही चूड़ा खाने का महत्व

मकर संक्रांति को नई फसल के आगमन के रूप में भी मनाया जाता है। धान की कटाई के बाद नया चूड़ा तैयार होता है, जिसे सबसे पहले भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में परिवार के साथ मिलकर खाया जाता है। ये परंपरा मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में देखने को मिलती है। परंपरा के साथ-साथ सेहत के लिए इसे काफी फायदेमंद माना जाता है।

क्यों खाते हैं दही-चूड़ा?


पाचन के लिए अच्छा : दही और चूड़ा दोनों ही पचने में बहुत आसान होते हैं। दही एक प्रोबायोटिक है, जो हमारे पेट के गुड बैक्टीरिया को बढ़ाता है और पाचन को दुरुस्त रखता है।

देता है इंस्टेंट एनर्जी : चूड़ा में अच्छी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है। सुबह-सुबह इसे खाने से आप दिन भर एक्टिव महसूस करते हैं।

प्राकृतिक आयरन और विटामिन का स्रोत : चूड़ा बनाने की प्रक्रिया में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जो खून की कमी को दूर करता है। वहीं, दही से हमें कैल्शियम और प्रोटीन मिलता है, जो हड्डियों के लिए अच्छा है।

गुड़ के साथ बढ़ जाता है पोषण : बहुत लोग दही-चूड़े के साथ गुड़ खाना पसंद करते हैं। गुड़ की तासीर गर्म होती है और शरीर को अंदर से गर्माहट देता है, जो जनवरी की ठंड में बहुत जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें

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