Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग, एकादशी पर खिचड़ी पर्व के लिए करना होगा ये उपाय

Makar Sankranti 2026: इस साल मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग पड़ रहा है। एकादशी के दिन खिचड़ी पर्व पड़ने से लोगों के मन में दुविधा है कि एकादशी पर चावल खाना और दान कैसे होगा ? आइए जानें एकादशी पर खिचड़ी खाने और दान करने के लिए क्या उपाय करना होगा

अपडेटेड Jan 10, 2026 पर 2:51 PM
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इस पर्व में काली उरद दाल और चावल की खिचड़ी बनाई जाती है और दान भी किया जाता है।

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व हर साल 14 जनवरी को सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में मनाया जाता है। इस मौके पर अलग-अलग जगहों पर भिन्न-भिन्न चीजें खाने और दान करने की परंपरा है। जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में कई जगह इस दिन को खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने और ऋतु परिवर्तन के प्रतीक इस पर्व में काली उरद दाल और चावल की खिचड़ी परंपरागत रुप से बनाई भी जाती है और इसका दान भी किया जाता है।

लेकिन इस साल मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग पड़ रहा है। यह एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन पड़ती है। एकादशी के व्रत में चावल खाना प्रतिवबंधित होता है। इसलिए इस साल लोगों के मन खिचड़ी पर्व को लेकर बहुत दुविधा है। एकादाशी के दिन बिना चावल के खिचड़ी पर्व कैसे मनेगा? आइए जानें विधि अनुसार इसका क्या उपाय हो सकता है?

एकादशी पर खिचड़ी पर्व के लिए करें ये उपाय

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का त्योहार इसी दिन ही मनाना उचित माना जाएगा। इस पर्व का महापुण्य काल दोपहर तीन बजकर 7 मिनट से शाम 6 बजे तक रहेगा। मकर-संक्रांति पर गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, कंबल, तिल, गुड़, चावल, उड़द दान करने से विशेष पुण्य मिलता है। विष्णु पुराण के मुताबिक चावल का दान में दोष नहीं लगता है। संक्रांति और एकादशी एक दिन होने के कारण चावल को लेकर दुविध में न रहें।

2003 में भी बना था ऐसा संयोग

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा संयोग 2003 में भी बना था और अब 23 साल बाद फिर से ऐसा हुआ है जब एकादशी और संक्रांति एक साथ पड़े थे। जब भी ऐसा संयोग बनता है तो सबसे पहले ये देखा जाता है कि उस दिन एकादशी तिथि कितने बजे तक रहेगी। पंचांग अनुसार माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी 14 जनवरी की शाम 5 बजकर 52 मिनट पर खत्म हो रही है। ऐसे में एकादशी तिथि के समाप्त होने पर चावल की खिचड़ी का सेवन और दान किया जा सकता है। इससे कोई दोष नहीं लगेगा।


नियमों से मुक्त होती हैं शुभी तिथियां

सनातन परंपरा के अनुसार शुभ तिथियां और त्योहार धार्मिक नियमों से मुक्त होते हैं। यही कारण है कि त्योहारों पर कोई भी शुभ कार्य बिना किसी संदेह के पूरा किया जा सकता है। एकादशी के दिन खिचड़ी खाने या दान करने में कोई दोष नहीं है और इसे लेकर दुविधा में रहने की भी जरूरत नहीं है।

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