Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व हर साल 14 जनवरी को सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में मनाया जाता है। इस मौके पर अलग-अलग जगहों पर भिन्न-भिन्न चीजें खाने और दान करने की परंपरा है। जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में कई जगह इस दिन को खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने और ऋतु परिवर्तन के प्रतीक इस पर्व में काली उरद दाल और चावल की खिचड़ी परंपरागत रुप से बनाई भी जाती है और इसका दान भी किया जाता है।
लेकिन इस साल मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग पड़ रहा है। यह एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन पड़ती है। एकादशी के व्रत में चावल खाना प्रतिवबंधित होता है। इसलिए इस साल लोगों के मन खिचड़ी पर्व को लेकर बहुत दुविधा है। एकादाशी के दिन बिना चावल के खिचड़ी पर्व कैसे मनेगा? आइए जानें विधि अनुसार इसका क्या उपाय हो सकता है?
एकादशी पर खिचड़ी पर्व के लिए करें ये उपाय
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का त्योहार इसी दिन ही मनाना उचित माना जाएगा। इस पर्व का महापुण्य काल दोपहर तीन बजकर 7 मिनट से शाम 6 बजे तक रहेगा। मकर-संक्रांति पर गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, कंबल, तिल, गुड़, चावल, उड़द दान करने से विशेष पुण्य मिलता है। विष्णु पुराण के मुताबिक चावल का दान में दोष नहीं लगता है। संक्रांति और एकादशी एक दिन होने के कारण चावल को लेकर दुविध में न रहें।
2003 में भी बना था ऐसा संयोग
नियमों से मुक्त होती हैं शुभी तिथियां
सनातन परंपरा के अनुसार शुभ तिथियां और त्योहार धार्मिक नियमों से मुक्त होते हैं। यही कारण है कि त्योहारों पर कोई भी शुभ कार्य बिना किसी संदेह के पूरा किया जा सकता है। एकादशी के दिन खिचड़ी खाने या दान करने में कोई दोष नहीं है और इसे लेकर दुविधा में रहने की भी जरूरत नहीं है।