Monsoon 2025 : अपने तय समय से 8 दिन पहले मानसून केरल पहुंच गया है। मौसम विभाग के मुताबिक 16 साल में ऐसा पहली बार हुआ जब मानसून इतनी जल्दी आया है। 2009 में मानसून 9 दिन पहले पहुंचा था। दक्षिण भारत में जोरदार शुरुआत के बाद अब दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र की तरफ बढ़ रहा है। अगर यह जल्द ही पहुंचता है, तो यह राज्य में मानसून के सबसे जल्दी आगमन में से एक हो सकता है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पश्चिमी तट पर भारी बारिश की चेतावनी दी है और बताया है कि अगले 2-3 दिनों में मानसून महाराष्ट्र में दस्तक दे सकता है। आमतौर पर मानसून 1 जून को केरल में पहुंचता है और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। लेकिन इस बार यह 24 मई को ही पहुंच गया, जो सामान्य समय से 8 दिन पहले है। यही नहीं, इस साल मानसून ने बीते 16 वर्षों में सबसे तेज़ रफ्तार से देश में एंट्री की है। यह अपनी तय तारीख से 12 दिन पहले मिजोरम भी पहुंच चुका है।
इन इलाकों में मानसून ने दी दस्तक
मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून ने शनिवार को एक साथ केरल, माहे, कर्नाटक के कुछ हिस्सों और तमिलनाडु के कई इलाकों में दस्तक दी। इसके साथ ही दक्षिण भारत के राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है। शनिवार तक मानसून की उत्तरी सीमा कारवार, शिमोगा (कर्नाटक), चेन्नई (तमिलनाडु) और सैहा (मिजोरम) तक पहुंच चुकी थी।
मौसम विभाग ने बताया कि पिछले दो दिनों में केरल में अच्छी बारिश हुई, जिससे मानसून के आगमन की पुष्टि हुई। दक्षिण-पूर्व अरब सागर और प्रायद्वीपीय भारत के आसपास के क्षेत्रों में बादल छाए हुए थे और सतह के पास 37 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिमी हवाएं बह रही थीं। आईएमडी ने कहा, "इन स्थितियों को देखते हुए, दक्षिण-पश्चिम मानसून आधिकारिक रूप से 24 मई को केरल पहुंच चुका है।"
मौसम के अनुकूल हालातों को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून जल्द ही गोवा को पूरी तरह कवर कर सकता है और आने वाले 2-3 दिनों में महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी प्रवेश कर सकता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस रफ्तार से यह मानसून महाराष्ट्र में अब तक के सबसे जल्दी पहुंचने वाले मानसूनों में से एक हो सकता है। आमतौर पर मानसून महाराष्ट्र में 9 जून के आसपास कोल्हापुर से शुरू होता है, फिर सतारा और पुणे तक फैलता है, 11 जून तक मुंबई और 15 जून तक नागपुर पहुंचता है। लेकिन इस बार इसकी तेजी को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि तटीय महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मानसून मई के अंत तक ही पहुंच सकता है।
आईएमडी के पूर्व वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक के. एस. होसलीकर ने कहा, "यह काफी असामान्य है, ऐसा अक्सर नहीं होता। कोंकण और गोवा में जैसी बारिश हो रही है, उसे देखकर लगता है कि एक-दो दिनों में ही मानसून महाराष्ट्र में दस्तक दे सकता है। यह मई में मानसून शुरू होने की एक बेहद दुर्लभ स्थिति हो सकती है। आमतौर पर ऐसा जून के पहले हफ्ते में होता है।"
पश्चिमी तट पर रेड अलर्ट जारी
केवल मानसून ही नहीं, बल्कि एक तेज़ मौसम प्रणाली ने भी देश के पश्चिमी तटीय इलाकों को प्रभावित किया है। पूर्व-मध्य अरब सागर और दक्षिण कोंकण तट के आसपास एक दबाव प्रणाली बनी, जिससे इस इलाके में तेज़ बारिश हुई और हवाएं करीब 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं। यह प्रणाली शनिवार दोपहर रत्नागिरी के पास दक्षिण कोंकण तट को पार कर गई।मौसम विभाग के अनुसार, यह प्रणाली अब पूर्व की ओर मध्य महाराष्ट्र की तरफ बढ़ रही है और रविवार तक धीरे-धीरे कमजोर होकर एक कम दबाव वाले क्षेत्र में बदल जाएगी। हालांकि, इसके असर से केरल, कर्नाटक, कोंकण-गोवा और आसपास के गुजरात तट पर 27 मई तक समुद्र की स्थिति काफी खराब रहने की संभावना है। लिहाजा, इन इलाकों में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
मानसून से दक्षिण भारत में जमकर बारिश
गोवा और महाराष्ट्र के साथ-साथ मानसून अब दक्षिण भारत के बाकी हिस्सों में भी तेज़ी से फैल रहा है। मौसम विभाग ने दक्षिणी राज्यों में अगले पाँच दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
आंध्र प्रदेश में भी मानसून समय से पहले पहुंच सकता है। आमतौर पर यहां 8 जून के आसपास बारिश की शुरुआत होती है। इसी तरह, कर्नाटक में भी मानसून तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। कर्नाटक के उडुपी जिले में मानसून हर साल लगभग 4 जून को आता है, लेकिन इस बार यह इससे पहले ही पहुंचने के आसार हैं। इस रफ्तार को देखते हुए मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार मानसून दक्षिण भारत में पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ और असरदार साबित हो सकता है।