66 किलो सोना, 335 किलो चांदी और ₹703 करोड़ का बीमा, मुंबई के इस गणपति की खासियत जानिए

मुंबई का जीएसबी सेवा मंडल गणपति अपनी भव्यता और सोने-चांदी की शानदार सजावट के लिए मशहूर है। गणेशोत्सव 2026 में यह एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार महागणपति से जुड़े कीमती सामान का ₹703.27 करोड़ का बीमा कराया गया है

अपडेटेड Sep 03, 2026 पर 4:17 PM
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मंडल ने वर्ष 2025 में ₹474 करोड़ और 2024 में ₹400 करोड़ का बीमा कराया था।

मुंबई का जीएसबी सेवा मंडल गणपति हर साल अपनी भव्यता, सोने-चांदी के आभूषणों और बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के कारण चर्चा में रहता है। गणेशोत्सव 2026 में यह गणपति एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार महागणपति की प्रतिमा और उत्सव से जुड़े कीमती सामान का ₹703.27 करोड़ का बीमा कराया गया है। बीमा की यह राशि पिछले वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है। इसी वजह से इस बार मंडल की तैयारियों और सुरक्षा को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह गणपति हर साल खास आकर्षण का केंद्र रहता है।

पिछले सालों के मुकाबले बढ़ा बीमा

मंडल ने वर्ष 2025 में ₹474 करोड़ और 2024 में ₹400 करोड़ का बीमा कराया था। इस बार बीमा राशि बढ़ने की बड़ी वजह सोने और चांदी के आभूषणों की बढ़ती कीमत बताई जा रही है। गणेशोत्सव के दौरान महागणपति को 66 किलो से अधिक सोने और 335 किलो से ज्यादा चांदी के आभूषणों से सजाया जाएगा। इन आभूषणों में कीमती रत्न भी शामिल हैं।


इनमें से कई आभूषण श्रद्धालुओं और सेवदारों की ओर से वर्षों से भेंट किए जाते रहे हैं। यही वजह है कि हर साल गणपति की सजावट और उससे जुड़े कीमती सामान को लेकर भक्तों में खास आकर्षण रहता है।

पांच दिन तक चलेगा भव्य उत्सव

किंग्स सर्कल स्थित श्री सुकृतेन्द्र नगर में महागणपति के पांच दिवसीय उत्सव का आयोजन होगा। इस दौरान प्रतिमा को फूलों और सोने-चांदी की भव्य सजावट से सजाया जाएगा। श्रद्धालु इस गणपति को ‘नवसाला पावणारा विश्वाचा राजा’ यानी मनोकामनाएं पूरी करने वाले विश्व के राजा के नाम से भी जानते हैं। इस वर्ष गणेशोत्सव 14 से 18 सितंबर तक मनाया जाएगा। हर दिन बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है। मुंबई के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से भी लोग महागणपति के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

सिर्फ भव्यता नहीं, सेवा भी पहचान

जीएसबी सेवा मंडल की स्थापना 1951 में एक धर्मार्थ और गैर-लाभकारी संस्था के तौर पर हुई थी। मंडल का गणेशोत्सव 1955 से आयोजित किया जा रहा है। धार्मिक आयोजन के साथ संस्था सालभर समाजसेवा से जुड़े कई कार्य भी करती है।

मंडल की ओर से चिकित्सा सहायता, शिक्षा सहयोग, रक्तदान अभियान, करियर मार्गदर्शन, ज्ञान शिविर और जरूरतमंदों के लिए विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम चलाए जाते हैं। समुदाय के सदस्यों को अंतिम संस्कार से जुड़ी सहायता भी प्रदान की जाती है।

200 बिस्तरों वाला अस्पताल बनाने की योजना

मंडल की बड़ी योजनाओं में मीरा-भायंदर के वर्सावे में 200 बिस्तरों वाला बहु-विशेषता धर्मार्थ अस्पताल भी शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य लोगों को किफायती दरों पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा मंडल की ‘संतुष्ट अन्नदान’ पहल भी लोगों तक मदद पहुंचाती है। कोविड महामारी के दौरान शुरू हुई इस पहल के तहत सार्वजनिक अस्पतालों, अनाथालयों और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में ताजा और पौष्टिक शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

इस बार पर्यावरण का भी रखा जा रहा ध्यान

गणेशोत्सव 2026 में मंडल ने पर्यावरण को लेकर भी कुछ बदलाव किए हैं। ‘गो ग्रीन’ अभियान के तहत कागजी रसीदों की जगह डिजिटल रसीदों का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।

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