मुंबई में 'लग्जरी' हाउसिंग को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। एक रिहायशी टावर की तस्वीर वायरल होने के बाद लोग करोड़ों रुपये के फ्लैट और उनकी वास्तविक सुविधाओं पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि महंगी कीमत चुकाने के बावजूद कई प्रोजेक्ट्स का बाहरी स्वरूप और डिजाइन उनकी 'लग्जरी' पहचान से मेल नहीं खाता। वहीं, दूसरे पक्ष का मानना है कि किसी इमारत की पहचान सिर्फ उसके बाहरी लुक से नहीं, बल्कि वहां रहने वालों की जरूरतों और सुविधाओं से भी तय होती है।
