मुंबई का गणेशोत्सव अपनी भव्यता, आस्था और अनोखी भेंटों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार साकिनाका चा महाराजा के दरबार में बप्पा को मिली एक ऐसी भेंट ने सबका ध्यान खींच लिया, जो आकार में विशाल होने के साथ-साथ सोच में भी बेहद खास है। मुंबई के सबसे ऊंचे गणपति के लिए 351 किलो का चीनी-मुक्त मोदक तैयार किया गया, जिसे मशहूर शेफ हर्ष केडिया ने बनाया है।
करीब चार फीट ऊंचे इस विशाल मोदक को देखकर श्रद्धालुओं के लिए यह यकीन करना भी मुश्किल था कि यह वही पारंपरिक मिठाई है, जिसे गणेशोत्सव में भगवान गणेश को सबसे प्रिय भोगों में गिना जाता है।
20 घंटे की मेहनत, भक्ति से जुड़ी कहानी
इस अनोखे मोदक को तैयार करने में शेफ हर्ष केडिया ने करीब 20 घंटे लगाए। हर्ष केडिया को उनके शुगर-कॉन्शस और डायबिटिक-फ्रेंडली व्यंजनों के लिए जाना जाता है। ऐसे में इस बार उन्होंने अपनी कला को सिर्फ एक विशाल मिठाई बनाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे भक्ति और समावेशिता से जोड़ दिया। मोदक को पूरी तरह चीनी-मुक्त रखा गया, ताकि उम्रदराज, डायबिटीज से जूझ रहे और स्वास्थ्य के प्रति सजग श्रद्धालु भी प्रसाद का आनंद ले सकें।
पारंपरिक मोदक में चॉकलेट का मॉडर्न ट्विस्ट
इस विशाल मोदक को खास बनाने वाली एक और चीज थी इसकी अंतिम सजावट। इसके ऊपर भारत में उगाए गए कोको से तैयार चॉकलेट की परत चढ़ाई गई। यानी आकार और परंपरा में भारतीय, लेकिन प्रस्तुति में आधुनिक अंदाज। 351 किलो वजन वाला यह मोदक किसी आम पूजा की थाली में समा जाए, ऐसा तो संभव ही नहीं था। इसे बप्पा के विशाल पंडाल में विशेष भेंट के रूप में रखा गया, जहां श्रद्धालुओं की निगाहें बार-बार इस विशाल मिठाई पर टिकती रहीं।
‘यह मोदक मेरे लिए भावुक पल है’
शेफ हर्ष केडिया ने सोशल मीडिया पर इस भेंट से जुड़ी अपनी भावनाएं साझा करते हुए इसे महज एक पाक-कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि बप्पा के प्रति प्रेम और समर्पण बताया। उनके संदेश का भाव यही था कि यह मोदक उनके हाथों से निकलकर बप्पा के दरबार तक पहुंचा है और इसके पीछे ढेर सारा प्यार है।
साकिनाका चा महाराजा की 42 फीट से अधिक ऊंची गणपति प्रतिमा के सामने रखा गया यह मोदक सिर्फ देखने की चीज बनकर नहीं रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, बाद में इसे श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।