नैनीताल घूमने का प्लान? पहले जान लें पास की इस ‘कंकालों वाली झील’ का खौफनाक सच

उत्तराखंड का नैनीताल “झीलों का शहर” कहलाता है, जहां एक-दो नहीं बल्कि सात खूबसूरत झीलें हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाती हैं। चारों तरफ पहाड़ों से घिरा यह शहर पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है। वहीं इसी राज्य में एक रहस्यमयी झील भी है, जिसे “कंकालों की झील” कहा जाता है

अपडेटेड May 05, 2026 पर 12:19 PM
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skeleton lake roopkund: लोहारजंग से 6-7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित डिडिना गांव एक खूबसूरत पड़ाव है।

अगर आप उन लोगों में हैं जिन्हें ट्रैवल में सिर्फ सुकून नहीं, बल्कि दिल को धड़काने वाला रोमांच भी चाहिए, तो ये जगह आपके लिए किसी सपने से कम नहीं। हिमालय की गोद में छिपी ये रहस्यमयी लोकेशन अपने अंदर कई अनकहे किस्से और राज समेटे हुए है। यहां पहुंचते ही आपको सिर्फ खूबसूरत नजारे ही नहीं, बल्कि एक अलग ही सिहरन का एहसास होगा। ये सफर सिर्फ ट्रेकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि हर कदम पर आपको इतिहास और रहस्य से जुड़ी कहानियां महसूस होंगी।

बर्फ से ढके पहाड़, शांत वादियां और अनजाने रहस्य इस यात्रा को और भी खास बना देते हैं। यही वजह है कि एडवेंचर पसंद करने वाले लोग इसे अपनी ड्रीम डेस्टिनेशन मानते हैं और यहां जाने का मौका नहीं छोड़ना चाहते।

‘स्केलेटन लेक’ का रहस्य


उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित रूपकुंड झील को “स्केलेटन लेक” के नाम से जाना जाता है। यहां गर्मियों में जब बर्फ पिघलती है, तो झील के अंदर सैकड़ों साल पुराने मानव कंकाल साफ दिखाई देते हैं। माना जाता है कि यहां 300 से 600 तक कंकाल मौजूद हैं, जो इस जगह को और भी रहस्यमयी बना देते हैं।

ट्रेक की शुरुआत

रूपकुंड ट्रेक का सबसे लोकप्रिय रास्ता लोहारजंग गांव से शुरू होता है। ये छोटा सा पहाड़ी गांव ट्रेकर्स के लिए बेस कैंप का काम करता है। यहां से लगभग 30-35 किलोमीटर का सफर तय करना होता है, जिसे पूरा करने में करीब 6-8 दिन लगते हैं।

ट्रेक रूट

इस ट्रेक का रास्ता लोहारजंग से डिडिना, आली बुग्याल, बेदनी बुग्याल, पातर नचौनी और भगुवाबासा होते हुए रूपकुंड झील तक पहुंचता है। हर पड़ाव अपने आप में खास है और अलग अनुभव देता है।

डिडिना गांव

लोहारजंग से 6-7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित डिडिना गांव एक खूबसूरत पड़ाव है। यहां की शांत वादियां और पारंपरिक जीवनशैली आपको कुछ समय के लिए यहीं ठहर जाने का मन कराएगी। आगे बढ़ने से पहले यहां जरूरी सामान चार्ज कर लेना जरूरी होता है।

आली बुग्याल

डिडिना से आगे बढ़ते ही आली बुग्याल का हरा-भरा मैदान आपका स्वागत करता है। चारों तरफ फैली हरियाली और पहाड़ों का नजारा ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने खुद इसे सजाया हो। यहां टेंट लगाकर रात बिताना किसी सपने जैसा अनुभव होता है।

अंतिम सफर

आगे का रास्ता धीरे-धीरे कठिन होता जाता है। बर्फ, पत्थर और ग्लेशियर के बीच चलते हुए आप जोंलीमठ और फिर रूपकुंड झील तक पहुंचते हैं। यह ट्रेक का सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन सबसे रोमांचक हिस्सा होता है।

जब सामने आते हैं कंकाल

जैसे ही आप झील तक पहुंचते हैं, सफेद बर्फ के बीच नीले पानी में पड़े कंकालों का दृश्य आपको भीतर तक हिला देता है। ऐसा लगता है जैसे इतिहास खुद बर्फ के नीचे सांस ले रहा हो।

क्यों खास है रूपकुंड ट्रेक?

यह ट्रेक सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि एक अनुभव है, जहां हर कदम पर रोमांच, हर मोड़ पर खूबसूरती और हर पल में रहस्य छिपा है। अगर आप एडवेंचर और अनोखे अनुभव की तलाश में हैं, तो रूपकुंड आपकी अगली मंजिल हो सकती है।

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