सिंगापुर में केपीएमजी (KPMG) में हाई पेईंग जॉब छोड़कर मुंबई में आकर नम्रता यादव ने लेखन को अपनाया है। 28 वर्षीय प्रोफेशनल ने एक स्थिर कंसल्टिंग करियर छोड़कर राइटिंग और स्पोकन-वर्ड परफॉर्मेंस पर फोकस करने का फैसला किया हैं। उन्होंने सिंगापुर से मुंबई शिफ्ट होकर वह क्रिएटिव रास्ता अपनाया, जिसे वह लंबे समय से टाल रही थीं। उनका कहना है कि कई वर्षों तक एकेडमिक और प्रोफेशनल अनुभव में जब व्यक्तिगत तौर पर संतुष्टि नहीं मिली जिसके बाद उन्होंने अपना रास्ता बदला। एक मीडिया कंपनी से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह ऐसा जीवन चाहती थीं जिसे वह एंजॉय करें, ना कि ऐसा जिसमें वह सिर्फ वीकेंड का इंतजार करें।
ऐसा रहा एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड
नम्रता ने भारत में लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से 2019 से 2021 के बीच इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर्स किया। इसके बाद उन्होंने वहीं रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम किया और वर्ष 2022 में KPMG जॉइन किया। उनकी सालाना इनकम करीब 57,000 सिंगापुर डॉलर (करीब ₹41.8 लाख) थी। सिंगापुर में रहना काफी महंगा है और हर महीने उनके करीब SG$3,200 खर्च होते थे और नम्रता के मुताबिक आर्थिक रूप से सब मैनेज हो रहा था।
नम्रता ने लंबे समय तक काम करने के बाद महसूस किया कि वह जो काम कर रही हैं, वह उनकी दिलचस्पियों से मेल नहीं खा रहा है। नम्रात का कहना है कि लेखन में उनकी रुचि पहले से थी। सिंगापुर में रहते हुए उन्होंने नियमित रूप से हिंदी में लिखना शुरू किया, जिसमें रिश्ते, परिवार, दोस्ती और हर दिन के अनुभव जैसे विषय शामिल थे। उन्होंने कहा कि लंबे वर्क शेड्यूल के चलते वह इसे पर्याप्त समय नहीं दे पा रही थीं तो उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं पर फिर से विचार किया।
फिर आई दिसंबर 2024, जब उन्हें लखनऊ के एक साहित्यिक महोत्सव में परफॉर्म करने के लिए चुना गया। उस महोत्सव को लेकर उन्होंने कहा कि वह दर्शकों के बीच होने की बजाय खुद स्टेज पर होना चाहती थीं। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने और भारत वापस आने का फैसला लिया। सितंबर 2025 तक वे मुंबई आ गईं, जहां उन्होंने शुरुआत में पार्ट-टाइम काम करने का सोचा, लेकिन इंटरव्यू देने के बाद उन्हें लगा कि डेस्क जॉब उनके लक्ष्य से मेल नहीं खाती।
हाई पेईंग जॉब छोड़ने के बाद अब कैसी चल रही जिंदगी?
मुंबई में नम्रता नए कलाकारों के लिए मशहूर अंधेरी वेस्ट में एक शेयरिंग अपार्टमेंट में रहती हैं। उनका किराया करीब ₹34,000 प्रति माह है जो सिंगापुर की तुलना में काफी कम है लेकिन उनका यह भी कहना है कि स्थिर इनकम छोड़ना काफी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा फिलहाल वह अपने कॉरपोरेट जॉब की बचत पर निर्भर हैं जो उन्हें अगले कुछ महीनों तक संभाल सकती है। जनवरी में उन्होंने 28 मार्च को अपनी पहली सोलो स्पोकन-वर्ड परफॉर्मेंस करने का लक्ष्य तय किया। इसके लिए उन्होंने तीन महीने का समय सिर्फ लेखन और तैयारी को दिया है।
उनके डेली रूटीन की बात करें तो सुबह कॉफी के बाद देर तक लिखती रहती हैं। वह सोशल मीडिया पर अपने क्रिएटिव प्रक्रिया भी शेयर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन उन्हें अपना लिखा हुआ बहुत पसंद आता है लेकिन कुछ दिन ऐसा भी होता है कि उन्हें कुछ शेयर करने लायक नहीं लगता। नम्रता के मुताबिक यह कॉरपोरेट माइंडसेट से उल्टा है, जहां हर दिन किसी ठोस परिणाम की उम्मीद होती है।
परिवार और भविष्य को लेकर बात करें तो उनका कहना है कि उनके माता-पिता गांव से है। शुरुआत में नम्रता के माता-पिता नौकरी छोड़ने के फैसले को लेकर निश्चिंत नहीं थे लेकिन अब उनका नजरिया बदल गया है। नम्रता ने कहा कि उनके माता-पिता को अब उनके फैसलों और मेहनत पर भरोसा है। हालांकि भविष्य को लेकर उन्होंने माना कि उन्हें आगे चलकर फिर से नौकरी करनी पड़ सकती है, लेकिन फिलहाल वह अपने लेखन और परफॉर्मेंस की क्षमता को पूरी तरह आजमाना चाहती हैं।