पैसों को लेकर लिया गया एक छोटा सा फैसला भी कई बार जिंदगी की बड़ी सीख बन जाता है। Zerodha के को-फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने अपने शुरुआती दिनों से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा साझा किया है, जो आज के युवाओं के लिए भी काफी दिलचस्प है। उन्होंने बताया कि महज 21 साल की उम्र में उन्होंने GMAT की फीस भरने के लिए क्रेडिट कार्ड लिया था। उस समय शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि करीब 25 हजार रुपये का यह खर्च लंबे समय तक उनका पीछा करेगा। कामथ के मुताबिक, इस कर्ज को पूरी तरह चुकाने में उन्हें लगभग ढाई साल लग गए। इस अनुभव ने उनके खर्च और उधार को लेकर नजरिया ही बदल दिया।
कर्ज खत्म करने के बाद उन्होंने क्रेडिट कार्ड काट दिया और कई वर्षों तक दोबारा इसका इस्तेमाल नहीं किया। आज जब क्रेडिट कार्ड और आसान लोन युवाओं के बीच आम हैं, कामथ का यह पुराना अनुभव एक अलग वित्तीय सबक सामने रखता है।
GMAT फीस भरने के लिए लिया था क्रेडिट कार्ड
एक Zerodha Varsity पॉडकास्ट के दौरान कामथ ने बताया कि उन्होंने 21 साल की उम्र में क्रेडिट कार्ड लिया था। इसका मकसद GMAT की फीस भरना था। GMAT एक ऐसा एग्जाम है, जिसका इस्तेमाल कई बिजनेस स्कूलों में दाखिले के लिए किया जाता है। लेकिन कहानी ने अलग मोड़ ले लिया। कामथ ने बताया कि उन्होंने आखिरकार GMAT की परीक्षा ही नहीं दी, क्योंकि उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं हो पाई थी।
₹25,000 का कर्ज चुकाने में लगे 2.5 साल
क्रेडिट कार्ड पर लिया गया करीब ₹25,000 का कर्ज उनके लिए महज एक छोटी रकम नहीं रहा। इसे पूरी तरह चुकाने में उन्हें लगभग ढाई साल लग गए। कामथ के मुताबिक, इस अनुभव ने उधार लेकर खर्च करने को लेकर उनकी सोच पूरी तरह बदल दी। कर्ज खत्म करने के बाद उन्होंने अपना क्रेडिट कार्ड तक काट दिया और लंबे समय तक दोबारा इसका इस्तेमाल नहीं किया।
12 साल से ज्यादा क्रेडिट कार्ड से बनाई दूरी
कामथ ने बताया कि 2003 में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बंद करने के बाद उन्होंने करीब साढ़े 12 साल तक दोबारा क्रेडिट कार्ड नहीं लिया। साल 2014 में उन्होंने फिर एक क्रेडिट कार्ड खरीदा। यानी शुरुआती अनुभव का असर इतना लंबा रहा कि उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय तक क्रेडिट से दूरी बनाए रखी।
खर्च करने में बुराई नहीं, लेकिन पैसा अपना होना चाहिए
पॉडकास्ट में बातचीत सिर्फ क्रेडिट कार्ड तक सीमित नहीं रही। लाइफस्टाइल और बढ़ते खर्च पर चर्चा के दौरान कामथ ने माना कि उन्हें खुद भी चीजों पर खर्च करना पसंद है। हालांकि, उनका मानना है कि अपनी कमाई के पैसे से यात्रा, खाना या दूसरे अनुभवों पर खर्च करना अलग बात है। समस्या तब पैदा हो सकती है, जब इन्हीं खर्चों के लिए किसी से पैसा उधार लेना पड़े। उनके मुताबिक, अनुभवों पर खर्च करना व्यक्ति के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसके लिए कर्ज पर निर्भर रहना जरूरी नहीं होना चाहिए।
‘भविष्य की कमाई’ के भरोसे खर्च करने से सावधान
कामथ ने युवाओं की एक आम आदत की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, कई लोग अपनी भविष्य की कमाई को आज के खर्च से जोड़ लेते हैं। उन्हें लगता है कि आने वाले समय में आय बढ़ जाएगी और आज का खर्च आसानी से संभल जाएगा। लेकिन कभी-कभी यही सोच आर्थिक परेशानी की वजह बन सकती है। इसलिए उनका जोर इस बात पर रहा कि मौजूदा कमाई के हिसाब से खर्च करना और अनावश्यक उधारी से बचना बेहतर वित्तीय अनुशासन हो सकता है।
यही सोच Zerodha के सफर में भी दिखी
कामथ की निजी वित्तीय सोच का असर उनके बिजनेस सफर में भी दिखाई देता है। उन्होंने अपने भाई निखिल कामथ के साथ 2010 में Zerodha की शुरुआत की थी। कंपनी ने बिना पारंपरिक वेंचर कैपिटल फंडिंग के अपने कारोबार को आगे बढ़ाया और टेक्नोलॉजी आधारित कम लागत वाले मॉडल पर फोकस किया। अपने पुराने अनुभव को याद करते हुए कामथ का संदेश सीधा है कमाई के भीतर रहकर खर्च करें, उन चीजों पर पैसा लगाएं जो आपके लिए मायने रखती हैं, लेकिन अपनी लाइफस्टाइल को कर्ज के भरोसे खड़ा करने से बचें।