मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा इलाके में उगने वाला प्रसिद्ध ‘नूरजहां’ आम एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अपनी विशाल साइज और भारी वजन के कारण इसे “आमों की रानी” कहा जाता है। इस खास किस्म के आम ने एक बार फिर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जब इस सीजन में इसका एक फल अपने असाधारण आकार के चलते सुर्खियों में आ गया। स्थानीय किसानों के अनुसार यह आम न सिर्फ देखने में अनोखा है बल्कि इसकी मांग भी लगातार बढ़ रही है।
कट्ठीवाड़ा क्षेत्र की पहचान बन चुका यह फल अब सिर्फ राज्य ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। इसकी खेती पूरी तरह पारंपरिक और खास देखरेख में की जाती है, जिससे इसकी गुणवत्ता और आकर्षण और भी बढ़ जाता है।
3.3 किलो का एक आम, कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
इस सीजन में एक ‘नूरजहां’ आम का वजन करीब 3.3 किलो दर्ज किया गया, जिसे ₹3,800 में बेचा गया। किसानों के अनुसार, कुछ फल तो ऐसे हैं जो 4 किलो तक पहुंच सकते हैं। इतनी भारी और बड़ी किस्म का आम बहुत ही दुर्लभ माना जाता है।
अलीराजपुर का कट्ठीवाड़ा क्षेत्र ‘नोहरजहां’ और अन्य प्रीमियम आमों की खेती के लिए जाना जाता है। यहां के किसान वर्षों से इस खास किस्म को संभाल रहे हैं, जो अब धीरे-धीरे पहचान और लोकप्रियता दोनों बढ़ा रही है।
किसान की मेहनत और कमाल की खेती
स्थानीय किसान भरतराज सिंह जादव के बाग में पुराने और नए दोनों तरह के ‘नूरजहां’ पेड़ हैं। उन्होंने बताया कि इस बार फसल अच्छी रही है और बड़े आकार के आमों की संख्या भी बढ़ रही है।
बिना केमिकल, पूरी तरह देसी तरीका
किसानों का दावा है कि इस खास आम की खेती में किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। पेड़ों की देखभाल पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक तरीकों से की जाती है, जिससे इसकी गुणवत्ता और स्वाद बेहतर रहता है।
देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच
इस खास आम की मांग सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात से लेकर तमिलनाडु तक लोग इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कुछ फल तो यूएई, अमेरिका और स्पेन तक भी पहुंच चुके हैं।
कीमती फसल की कड़ी सुरक्षा
कीमत और मांग को देखते हुए बागों में खास सुरक्षा भी रखी जाती है। कई गार्ड्स की तैनाती की गई है ताकि फलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
किसानों के अनुसार, पहले ‘नोहरजहां’ आम 4.5 किलो तक भी पहुंच जाता था, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन और पेड़ों की उम्र बढ़ने के कारण इसका औसत वजन थोड़ा कम हो गया है।
जून में तैयार होता है “राजसी आम”
यह खास किस्म जनवरी में फूल देना शुरू करती है और जून तक पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है, तब जाकर बाजार में इसकी बिक्री होती है।