एक-एक की कीमत 20-25 लाख! ओड़िशा के जंगल में लावारिस मिले 5 दुर्लभ ओरंगुटान, कहां से भारत आ गए ये?

ओडिशा के बालासोर में जंगल की गश्त के दौरान वन विभाग को पांच नन्हे ओरंगुटान लावारिस हालत में मिले। भारत में इनका प्राकृतिक आवास नहीं है, इसलिए यह घटना बेहद हैरान करने वाली है। अधिकारियों ने सभी को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि ये यहां तक पहुंचे कैसे

अपडेटेड Sep 09, 2026 पर 3:20 PM
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‘ओरंगुटान’ नाम मलय और इंडोनेशियाई भाषा के शब्दों से बना है, जिसका अर्थ ‘जंगल का इंसान’ माना जाता है।

ओडिशा के बालासोर जिले में जंगल की गश्त के दौरान वन विभाग की टीम को ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सभी को हैरान कर दिया। उदयपुर-तालसारी इलाके में पांच नन्हे ओरंगुटान लावारिस हालत में पाए गए। भारत में इन जानवरों का प्राकृतिक रूप से न पाया जाना इस मामले को और रहस्यमय बना रहा है। वन अधिकारियों ने तुरंत सभी ओरंगुटान को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के इन नन्हे जीवों को आखिर भारत कौन और कैसे लेकर आया? घटना के बाद वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

छह महीने से एक साल तक की उम्र

वन अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए पांचों ओरंगुटान बेहद छोटे हैं। इनमें तीन नर और दो मादा शामिल हैं। उनकी उम्र करीब छह महीने से एक साल के बीच बताई जा रही है। रेस्क्यू के बाद सभी को भुवनेश्वर के नंदनकानन जू ले जाया गया, जहां उन्हें फिलहाल क्वारंटीन में रखा गया है।


भारत में इनका मिलना क्यों हैरान करने वाला?

ओरंगुटान भारत के जंगलों में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। इनका मूल निवास दक्षिण-पूर्व एशिया के वर्षावन हैं, खासकर इंडोनेशिया और मलेशिया के इलाकों में। यही वजह है कि बालासोर के जंगल में एक साथ पांच बेबी ओरंगुटान मिलना वन अधिकारियों के लिए बड़ा सवाल बन गया है।

क्या तस्करों ने जंगल में छोड़ दिए?

जांच में सबसे मजबूत आशंका अवैध वन्यजीव तस्करी की सामने आ रही है। अधिकारियों को शक है कि इन जानवरों को किसी अवैध अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के जरिए भारत लाया जा रहा था और किसी वजह से उन्हें रास्ते में छोड़ दिया गया। क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक प्रकाश चंद्र गोगिनेनी ने इसे कथित तौर पर एक असफल ट्रांजिट ऑपरेशन बताया है। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच पूरी होने से पहले यह कहना जल्दबाजी होगी कि ओरंगुटान भारत में किस रास्ते से लाए गए।

रात के अंधेरे में छोड़े जाने का शक

बालासोर के डीएफओ इंदलकर प्रतीक प्रकाश के मुताबिक, संभावना है कि इन ओरंगुटान को सोमवार रात या मंगलवार तड़के जंगल में छोड़ा गया हो।

वन विभाग ने मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। अब जांचकर्ताओं का फोकस इन्हें भारत लाने वाले लोगों और पूरे तस्करी नेटवर्क तक पहुंचने पर है।

हर ओरंगुटान की कीमत लाखों में

ओडिशा के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ओरंगुटान की कीमत करीब 20 से 25 लाख रुपये तक बताई जाती है। इसी वजह से अधिकारियों को शक है कि इनके पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का हाथ हो सकता है।

पेड़ों पर जिंदगी बिताते हैं ओरंगुटान

ओरंगुटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान प्राइमेट्स में गिने जाते हैं। ये अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर बिताते हैं और मुख्य रूप से फल, पत्तियां और वनस्पति खाते हैं। दुनिया में ओरंगुटान की तीन मान्य प्रजातियां हैं बोर्नियन, सुमात्रन और तापनुली। तीनों ही गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं और इनके सामने जंगलों का खत्म होना, शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार जैसी बड़ी चुनौतियां हैं।

जंगल के इंसानके नाम से क्यों जाने जाते हैं?

‘ओरंगुटान’ नाम मलय और इंडोनेशियाई भाषा के शब्दों से बना है, जिसका अर्थ ‘जंगल का इंसान’ माना जाता है। भारत के जंगल में इन नन्हे जीवों का यूं लावारिस मिलना सिर्फ हैरान करने वाली घटना नहीं, बल्कि अवैध वन्यजीव व्यापार की एक गंभीर तस्वीर भी सामने लाता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये पांचों बच्चे भारत तक पहुंचे कैसे और उन्हें जंगल में छोड़कर कौन चला गया?

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