डेट पर जाने से पहले नहाना छोड़ रहे लड़के! ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ ट्रेंड ने मचाई हलचल

सोशल मीडिया पर डेटिंग से जुड़ा एक अजीब ट्रेंड तेजी से चर्चा में है। इसे ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ कहा जा रहा है, जिसमें कुछ युवा डेट पर जाने से पहले नहाने और डियोड्रेंट लगाने से बचते हैं। उनका मानना है कि शरीर की प्राकृतिक गंध उन्हें ज्यादा आकर्षक बना सकती है। लेकिन क्या वाकई इसके पीछे विज्ञान है?

अपडेटेड Aug 30, 2026 पर 1:27 PM
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‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ का विचार भले ही सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा हो

सोशल मीडिया पर इन दिनों डेटिंग से जुड़ा एक अजीब ट्रेंड चर्चा में है। इसे ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ कहा जा रहा है। इस ट्रेंड को फॉलो करने वाले कुछ युवा डेट पर जाने से पहले न नहाने और डियोड्रेंट न लगाने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि शरीर की प्राकृतिक गंध उन्हें संभावित साथी के सामने ज्यादा आकर्षक बना सकती है।

यह ट्रेंड खास तौर पर किशोरों और युवा पुरुषों के बीच चर्चा में आया है और अब टिकटॉक से लेकर एक्स तक इसकी खूब बातें हो रही हैं।

Looksmaxxing से जुड़ा है यह अजीब ट्रेंड


‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ को इंटरनेट पर चल रहे बड़े ‘लुक्समैक्सिंग’ चलन का ही एक हिस्सा माना जा रहा है। लुक्समैक्सिंग में लोग अपनी शक्ल-सूरत और व्यक्तित्व को बेहतर दिखाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं।

लेकिन फेरोमोन-मैक्सिंग में मामला थोड़ा अलग है। यहां आकर्षण बढ़ाने के लिए साफ-सफाई और साज-सज्जा पर ध्यान देने के बजाय प्राकृतिक शरीर की गंध को प्राथमिकता देने की बात की जा रही है।

क्या सच में शरीर की गंध बना सकती है आकर्षक?

इस ट्रेंड के पीछे यह धारणा है कि इंसान शरीर से ऐसे रासायनिक संकेत छोड़ सकता है, जिन्हें संभावित साथी महसूस कर आकर्षित हो सकता है। इन्हें फेरोमोन कहा जाता है। जानवरों और कीड़ों में फेरोमोन की भूमिका अच्छी तरह दर्ज की गई है, लेकिन इंसानों में फेरोमोन सीधे तौर पर आकर्षण पैदा करते हैं या नहीं, इस पर वैज्ञानिक सहमति नहीं है।

यानी सोशल मीडिया पर जिस दावे को काफी आत्मविश्वास से पेश किया जा रहा है, उसके पीछे अभी ठोस वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं।

पसीने वाली टी-शर्ट ने भी खींचा था वैज्ञानिकों का ध्यान

गंध और आकर्षण के संबंध को समझने के लिए 1995 में एक चर्चित प्रयोग किया गया था, जिसे आम तौर पर ‘स्वेटी टी-शर्ट अध्ययन’ के नाम से जाना जाता है। इस प्रयोग में पुरुषों को लगातार दो रात एक ही टी-शर्ट पहनने को कहा गया। बाद में महिलाओं से इन टी-शर्ट की गंध को रेट करने के लिए कहा गया। अध्ययन में शरीर की गंध और कुछ आनुवंशिक विशेषताओं के बीच संभावित संबंध सामने आया। हालांकि, बाद के शोधों में इस बात की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी कि इंसान लगातार ऐसे साथी को ही ज्यादा पसंद करते हैं, जिसकी आनुवंशिक विशेषताएं उनसे अलग हों।

सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा- डेट पर जाने से पहले नहा लो!

ट्रेंड वायरल होने के बाद इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। ज्यादातर यूजर्स इस तरीके से बिल्कुल सहमत नजर नहीं आए। कई लोगों ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि डेट पर आकर्षक दिखने का सबसे आसान तरीका नहाना, डियोड्रेंट लगाना, दांत साफ करना और जरूरत हो तो हल्का परफ्यूम लगाना है।

कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति सामने वाले को अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है, तो जानबूझकर ऐसी गंध पैदा करना कितना सही है, जिससे दूसरा व्यक्ति असहज हो जाए।

ट्रेंड को लेकर वैज्ञानिक सबूत अब भी कमजोर

‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ का विचार भले ही सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा हो, लेकिन फिलहाल ऐसा मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि न नहाने या डियोड्रेंट छोड़ने से कोई व्यक्ति डेट पर ज्यादा आकर्षक बन जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस सलाह और वैज्ञानिक तथ्यों के बीच यही सबसे बड़ा अंतर है। प्राकृतिक शरीर की गंध इंसानी पसंद और प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इसे जानबूझकर बढ़ाकर रोमांटिक आकर्षण हासिल करने का दावा अभी साबित नहीं हुआ है।

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