आज के समय में हवाई यात्रा लोगों की लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुकी है। बिजनेस ट्रिप हो, फैमिली वेकेशन या फिर वीकेंड गेटअवे, लाखों लोग रोजाना फ्लाइट से सफर करते हैं। हालांकि यात्रा के दौरान कई ऐसी चीजें होती हैं, जिन पर हमारा ध्यान नहीं जाता। इन्हीं में से एक है टेकऑफ और लैंडिंग से पहले केबिन की लाइटों का अचानक मंद हो जाना।
ज्यादातर यात्री इसे सामान्य प्रक्रिया समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे एक खास वजह छिपी होती है। दिलचस्प बात यह है कि यह छोटा सा कदम यात्रियों की सुरक्षा और आराम दोनों से जुड़ा हुआ है। आखिर फ्लाइट में ऐसा क्यों किया जाता है, इसका कारण जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
आंखों को पहले से तैयार करने का तरीका
टेकऑफ और लैंडिंग फ्लाइट के सबसे अहम चरण माने जाते हैं। अगर किसी वजह से इस दौरान इमरजेंसी आ जाए और यात्रियों को तुरंत विमान से बाहर निकलना पड़े, तो उनकी आंखों का बाहर की रोशनी या अंधेरे के हिसाब से तैयार होना जरूरी होता है।
इसी कारण केबिन की लाइटें धीमी कर दी जाती हैं। इससे आंखें कम रोशनी में देखने की आदी हो जाती हैं और जरूरत पड़ने पर लोग आसानी से बाहर का रास्ता देख सकते हैं।
इमरजेंसी में समय बचाने के लिए
हमारी आंखों को तेज रोशनी से अंधेरे में या अंधेरे से रोशनी में ढलने में थोड़ा समय लगता है। ऐसे में अगर अचानक कोई आपात स्थिति बन जाए, तो यह देरी परेशानी पैदा कर सकती है।
लाइटें कम होने से यात्री इमरजेंसी एग्जिट, सुरक्षा संकेत और बाहर निकलने के रास्तों को जल्दी पहचान पाते हैं। इससे जरूरत पड़ने पर विमान को तेजी से खाली कराया जा सकता है।
बाहर की स्थिति पर भी रहती है नजर
केबिन की रोशनी कम होने का एक फायदा यह भी है कि यात्रियों और क्रू मेंबर्स को विमान के बाहर का नजारा ज्यादा साफ दिखाई देता है।
अगर रनवे या विमान के आसपास कोई असामान्य गतिविधि हो, तो उसे जल्दी देखा जा सकता है। यही वजह है कि टेकऑफ और लैंडिंग से पहले यह प्रक्रिया लगभग हर फ्लाइट में अपनाई जाती है।