Planetary parade in February 2026: फरवरी के लास्ट में इस दिन एक साथ नजर आएंगे ये 6 ग्रह, जानें कब और कहां देखें?

Planetary parade in February 2026: एस्ट्रोनॉमी में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए फरवरी का महीना बहुत खास साबित होगी। हाल ही में हुए सूर्य ग्रहण के बाद अब इसी महीने में एक और आसमानी दुर्लभ नजारा दिखने वाला है। आसमान में एक साथ 6 ग्रह सामान्य आंखों से देखे जा सकेंगे

अपडेटेड Feb 20, 2026 पर 4:12 PM
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ये दुर्लभ और अविश्वस्नीय नजारा 28 फरवरी को सूरज डूबने के तुरंत बाद होगा।

Planetary parade in February 2026: फरवरी का महीना एस्ट्रोनॉमी में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए बेहद खास होने वाला है। खगोल शास्त्र के नजरिए से इस महीने में दो दुर्लभ नजारे देखने को मिलेंगे। इनमें से एक हाल ही में दुनिया ने देखा था, जो एक वलयाकार सूर्य ग्रहण था। अब चांद-तारों की बातें करने वाले सभी लोग बेसब्री से इस दूसरे नजारे का इंतजार कर रहे हैं। फरवरी के अंत में 6 ग्रह एक साथ आसमान में नजर आएंगे। खास बात ये है कि ये नजारा सामान्य आंखों से देखा जा सकेगा। ये दुर्लभ और अविश्वस्नीय नजारा 28 फरवरी को सूरज डूबने के तुरंत बाद होगा, जब लोगों को ग्रहों की अनोखी परेड देखने का मौका मिलेगा।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, बुध, शुक्र, शनि, बृहस्पति, यूरेनस और नेपच्यून आसमान में एक लाइन में दिखाई देंगे। स्पेस एजेंसी का कहना है कि इन ग्रहों को पूरे फरवरी में सूरज डूबने के ठीक बाद देखा जा सकता है, लेकिन न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक, महीने के आखिर में उनका अलाइनमेंट सबसे अच्छा होगा। फरवरी महीने की शुरुआत ‘स्नोमून’ के साथ हुई थी, महीने के बीच में ‘रिंग ऑफ फायर’ देखा और अब बारी है ‘ग्रह की परेड’ की

कब और कैसे देखें ग्रहों की परेड?

अगर मौसम साफ रहा, तो छह में से सिर्फ चार ग्रह ही नंगी आंखों से दिखाई देंगे। यूरेनस और नेपच्यून के लिए बाइनोकुलर्स या टेलिस्कोप की जरूरत होगी। मरकरी को भी कभी-कभी देखना मुश्किल हो सकता है।

भारत में भी दिखेगी ग्रहों की परेड

प्लैनेटरी परेड का यह नजारा अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत में भी दिखाई देगा। बुध, शुक्र, शनि और बृहस्पति को बिना किसी उपकरण के देखा जा सकता है। वहीं, यूरेनस और नेपच्यून के लिए दूरबीन की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए आसमान का साफ रहना जरूरी होगा।


सभी ग्रहों का दिखना मुश्किल

नासा का कहना है कि किसी ग्रह को बिना उपकरणों के देखने के लिए, उसे हॉराइजन से कुछ डिग्री ऊपर होना चाहिए, जिसमें 10 डिग्री या उससे ज्यादा की ऊचाई सबसे अच्छी मानी जाती है। एजेंसी के मुताबिक, ऐसा इसलिए है क्योंकि पृथ्वी का निचला एटमॉस्फियर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय एस्ट्रोनॉमिकल बॉडीज की रोशनी को धुंधला कर देता है। जब ग्रह बहुत नीचे होते हैं, तो उन्हें देखना मुश्किल या नामुमकिन हो सकता है, क्योंकि उनकी रोशनी आंखों तक पहुँचने से पहले ही बिखर जाती है और सोख ली जाती है। हॉराइजन के पास की इमारतें, पेड़ और दूसरी रुकावटें भी नजारा रोक सकती हैं।

देखने का सबसे अच्छा तरीका

28 फरवरी को सूरज डूबने के लगभग 30 मिनट बाद पश्चिम दिशा में इन ग्रहों को एक सीध में देखा जा सकता है। इसके लिए साफ आसमान, पश्चिम की तरफ खुली जगह, बिना रुकावट वाला क्षेत्रहोना चाहिए।

क्यों दुर्लभ है यह घटना?

नासाके मुताबिक, मौसम के हिसाब से ज्यादातर रातों में कम से कम एक चमकीला ग्रह देखा जा सकता है। आमतौर पर सूर्यास्त के आसपास दो या तीन ग्रह दिखाई देते हैं, और कभी-कभी बिना किसी इंस्ट्रूमेंट के चार या पांच चमकते ग्रह एक साथ देखे जा सकते हैं। एजेंसी का कहना है कि हर कुछ सालों में चार या पांच ग्रहों के एक साथ आने की घटना होती है, जिसे साधारण आंखों से देखा जा सकता है।

नासा का कहना है कि अगली ऐसी घटना अक्टूबर 2028 के आखिर में होगी, जब पांचों ग्रह सूरज उगने से पहले एक साथ दिखाई देंगे। फिर, फरवरी 2034 के आखिर में, पांचों ग्रह सूरज डूबने के बाद फिर से दिखाई देंगे, हालांकि तब भी शुक्र और बुध को देखना मुश्किल हो सकता है।

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