₹1.5 लाख सैलरी, फिर भी ₹20 हजार महीना बचाना मुश्किल... क्या इतना महंगा है बेंगलुरु में रहना?

Bengaluru cost of living: बेंगलुरु में 1.5 लाख रुपये महीने की सैलरी होने के बावजूद बचत करना मुश्किल हो सकता है। किराया, खाना, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के खर्च तेजी से बढ़ जाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट ने बड़े शहर की महंगी जिंदगी की हकीकत दिखा दी। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 15, 2026 पर 4:11 PM
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बेंगलुरु में ऑफिस के पास एक छोटे से अपार्टमेंट का किराया करीब 36 हजार रुपये था।

Bengaluru cost of living: बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है। यहां हाई सैलरी वाली टेक नौकरियां, आधुनिक ऑफिस और तेज रफ्तार लाइफस्टाइल देखने को मिलती है। लेकिन कई नए लोगों के लिए बड़ी सैलरी का उत्साह जल्द ही शहर के महंगे खर्चों की हकीकत से टकरा जाता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इसमें एक यूजर ने अपने कजिन का बेंगलुरु का अनुभव शेयर किया है। इस पोस्ट में बताया गया है कि शहर के खर्चों को देखते हुए 1.5 लाख रुपये महीने की सैलरी होने के बावजूद बचत करना आसान नहीं होता।


यूजर ने बताया कि उसका कजिन ग्रेजुएशन के तुरंत बाद टेक जॉब के लिए बेंगलुरु चला गया था। उसने लिखा, 'मेरा कजिन 1.5 लाख रुपये महीने की टेक जॉब के लिए बेंगलुरु गया। छह महीने बाद उसे एक ऐसी बात समझ में आई, जो नए लोगों को कोई नहीं बताता। वह कंप्यूटर साइंस का ग्रेजुएट है और अपनी पहली सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी के लिए बेहतर मौके की तलाश में बेंगलुरु आया था।'

परिवार को थी बड़ी उम्मीद

परिवार को इस नौकरी से काफी उम्मीदें थीं। यूजर ने लिखा, 'घर पर सबको लगा कि उसने बड़ी सफलता हासिल कर ली है। बड़ी टेक जॉब, बड़ा शहर और बड़ी सैलरी।' लेकिन शहर में रहने के रोजमर्रा के खर्चों ने जल्दी ही असली तस्वीर साफ कर दी। पोस्ट में बताया गया कि बुनियादी खर्च ही तेजी से बढ़ने लगे।

ऑफिस के पास एक छोटे से अपार्टमेंट का किराया करीब 36 हजार रुपये था। खाने और ग्रोसरी पर हर महीने 13 हजार से 15 हजार रुपये खर्च हो जाते थे। शहर में भारी ट्रैफिक की वजह से कैब और ऑटो पर 6 हजार से 8 हजार रुपये तक खर्च होने लगे। वहीं कभी-कभी ऑनलाइन खाना मंगाने, कॉफी पीने और वीकेंड पर बाहर जाने जैसे खर्च मिलाकर करीब 10 हजार से 12 हजार रुपये और खर्च हो जाते थे।

छोटे-छोटे खर्च भी पड़ते हैं भारी

यूजर ने उन खर्चों का भी जिक्र किया जिन पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते, लेकिन महीने के बजट पर उनका भी असर पड़ता है। उसने लिखा, 'इसके बाद वे खर्च आते हैं जिनके बारे में कोई ज्यादा बात नहीं करता। सब्सक्रिप्शन, मेडिकल खर्च, अचानक आने वाले बिल और घर पैसे भेजना। महीने के आखिर तक बचत मुश्किल से 15 हजार से 20 हजार रुपये ही रह जाती थी।'

बड़ी सैलरी का मतलब समझ आया

इस अनुभव के बाद उसके कजिन की सोच बदल गई कि बड़े शहर में बड़ी सैलरी का असली मतलब क्या होता है। यूजर ने लिखा, 'तभी उसे समझ आया कि बड़े शहरों के बाहर रहने वाले लोग एक बात नहीं समझ पाते। अपने शहर में 1 लाख से ज्यादा की सैलरी बहुत बड़ी लगती है, लेकिन बेंगलुरु जैसे शहर में इसका मतलब अक्सर सिर्फ इतना होता है कि आपने अभी शुरुआत की है। बड़ी सैलरी, छोटी बचत... यही है बेंगलुरु की जिंदगी।'

लोगों ने दिए किराया कम करने के सुझाव

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपनी राय भी दी। कुछ लोगों ने सलाह दी कि अगर ऑफिस से थोड़ा दूर और मेट्रो लाइन के पास घर लिया जाए, तो किराया काफी कम हो सकता है।

एक यूजर ने लिखा, 'अगर ऑफिस से थोड़ा दूर और मेट्रो के पास घर लिया जाए, तो किराया काफी बचाया जा सकता है। कई लोग ऑफिस के बिल्कुल पास रहना चाहते हैं, जहां किराये के घर कम होते हैं और मांग ज्यादा होती है, इसलिए किराया बहुत बढ़ जाता है। अगर थोड़ा दूर लेकिन पहुंचने में आसान जगह देखी जाए, तो फायदा हो सकता है। हालांकि अगर ऑफिस के पास मेट्रो न हो, तो दिक्कत हो सकती है।'

बड़े शहरों के खर्च पर भी चर्चा

कुछ लोगों ने बड़े शहरों की सैलरी और वहां के खर्च के अंतर पर भी बात की। एक यूजर ने लिखा, 'अगर आप अपने शहर में काम कर रहे हैं, तो वही आपकी सबसे अच्छी कमाई होती है।' वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, 'यह सही है, बड़े शहर धीरे-धीरे आपकी जेब खाली कर देते हैं।'

Disclaimer: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर शेयर किए गए यूजर जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही उनका समर्थन करता है।

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