Watermelon Prices: देश के फल बाजारों से लेकर सोशल मीडिया तक, इस समय 'तरबूज' चर्चा का विषय बना हुआ है। ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण भारतीय तरबूज की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। रमजान के महीने में, जब खाड़ी देशों में भारतीय तरबूज की भारी मांग होती थी, वहां निर्यात ठप होने से घरेलू बाजारों में इसकी आवक अचानक बढ़ गई है जिससे कीमतें औंधे मुंह गिर गई है।
निर्यात बंद होने से बढ़ा संकट
भारत से हर साल बड़ी मात्रा में तरबूज कतर, यूएई, बहरीन और ओमान जैसे देशों को निर्यात किए जाते हैं। रमजान के दौरान इन देशों में तरबूज और खरबूजे की खपत काफी ज्यादा रहती है। ईरान युद्ध के कारण समुद्री रास्ते और एयरस्पेस पर लगी पाबंदियों की वजह से शिपमेंट रुक गए हैं। जो फल विदेश जाने थे, वे अब देश की स्थानीय मंडियों में पहुंच रहे हैं, जिससे सप्लाई जरूरत से ज्यादा हो गई है।
एशिया की सबसे बड़ी आजादपुर फल मंडी में तरबूज की कीमतों में बड़ा अंतर देखा गया है। फरवरी में जो तरबूज ₹3,275 प्रति क्विंटल बिक रहा था, वह मार्च में गिरकर ₹2,301 पर आ गया है। यानी एक महीने में 29% की गिरावट। हालांकि, पिछले साल की तुलना में कीमतें अब भी अधिक हैं, क्योंकि तब थोक भाव ₹1,482 प्रति क्विंटल के आसपास था।
सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस?
सोशल मीडिया, खासकर 'X' पर तरबूज की कीमतों को लेकर किसान और कारोबारी अपनी चिंता जता रहे हैं। कर्नाटक के एक कृषि उद्यमी, अरुणा उर्स ने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में तरबूज की कीमतें गिरकर ₹7 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। एक किसान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पहले अच्छी क्वालिटी का तरबूज ₹25 किलो बिक रहा था, लेकिन अब व्यापारी इसे ₹6-7 किलो में भी खरीदने को तैयार नहीं हैं।
मंडी में सस्ता, ऐप्स पर महंगा
एक तरफ मंडियों में कीमतें गिर रही हैं, तो दूसरी तरफ 'क्विक कॉमर्स' Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart पर कीमतें अब भी आसमान छू रही हैं। दिल्ली के ऑनलाइन ऐप्स पर तरबूज अब भी ₹100 किलो के पार बिक रहा है, वहीं बेंगलुरु में यह ₹80 किलो के आसपास है। खुदरा ग्राहकों को थोक बाजार की गिरावट का फायदा अब तक नहीं मिल पाया है।