600 साल से जमीन में दफन था रहस्यमयी खजाना, घड़ा खुला तो उड़े सबके होश...निकली ये कीमती चीजें

रूस के कोलोम्ना शहर में खुदाई के दौरान करीब 600 साल पुराना खजाना मिला है। मिट्टी के एक घड़े में छिपे इस खजाने में 2,600 से ज्यादा दुर्लभ चांदी के सिक्के मिले हैं। इन चांदी के सिक्कों में 350 से ज्यादा सिक्के ऐसे हैं, जिनका पहले किसी रिकॉर्ड में उल्लेख नहीं मिला था

अपडेटेड Aug 30, 2026 पर 12:17 PM
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ये खोज 14वीं और 15वीं सदी के इतिहास से जुड़ी है (Photo: Archaeology of Russian Academy of Sciences)

रूस के मॉस्को से करीब 114 किलोमीटर दूर कोलोम्ना शहर के जमीन के नीचे सदियों पुराना दबा हुआ खजाना मिला है। रूस के कोलोम्ना में खुदाई के दौरान मिले इस पुराने खजाने ने इतिहासकारों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। खुदाई के दौरान मिले इस खजाने को खूबसूरत मिट्टी के घड़े के अंदर सुरक्षित रखा गया था। जमीन से मिले इस खजाने में 2,600 चांदी के दुर्लभ सिक्के मिल है। इन चांदी के सिक्कों में 350 से ज्यादा सिक्के ऐसे हैं, जिनका पहले किसी रिकॉर्ड में उल्लेख नहीं मिला था। एक्सपर्ट के मुताबिक, इतने ज्यादा सिक्के किसी आम व्यक्ति के पास नहीं हो सकते थे। इसलिए अंदाजा लगाया जा रहा कि इस खजाने को किसी अमीर व्यक्ति किसी वजह से इसे सुरक्षित रखने के लिए जमीन में छिपाया होगा। ये भी अनुमान है कि किसी उस समय फैली प्लेग महामारी की वजह से वह व्यक्ति वापस नहीं आ सका और खजाना वहीं दबा रह गया।

14वीं-15वीं सदी से जुड़ा हो सकता है

रूस की एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी के मुताबिक ये खोज 14वीं और 15वीं सदी के इतिहास से जुड़ी है। माना जा रहा है कि घड़ा करीब 600 साल तक जमीन के नीचे दबा रहा, जिसकी वजह से सिक्के इतने लंबे समय तक सुरक्षित रह सके। कोलोम्ना में समय के साथ कई बार निर्माण हुआ और शहर की पुरानी परतों में काफी बदलाव आया, लेकिन जमीन की गहरी परतों में आज भी मध्यकालीन बस्तियों से जुड़े कई सबूत मौजूद हैं। इन अवशेषों से उस समय के लोगों की जिंदगी, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।


'देंगा' सिक्के सबसे ज्यादा

रशियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के आर्कियोलॉजी इंस्टीट्यूट के मुताबिक, ये ऐतिहासिक खजाना एक खूबसूरत मिट्टी के घड़े के अंदर मिला है। घड़े को जमीन में एक गड्ढा खोदकर छिपाया गया था, जो अब कोलोम्ना के ऐतिहासिक इलाके का हिस्सा है। कोलोम्ना मॉस्को से करीब 114 किलोमीटर दूर स्थित है। इतिहास के मुताबिक, 14वीं और 15वीं सदी के दौरान यह शहर इस क्षेत्र के प्रमुख शहरों में शामिल था और यहां व्यापार के साथ-साथ कई तरह की आर्थिक गतिविधियां भी होती थीं। मिले हुए खजाने में ज्यादातर सिक्के ‘देंगा’ नाम की पुरानी रूसी मुद्रा हैं। देंगा को सबसे पहले 14वीं सदी के आखिर में मॉस्को की ग्रैंड प्रिंसिपिलिटी ने ढाला था, जो एक पुराने जमाने की रूसी राजशाही थी। हर डेंगा की कीमत आधा कोपेक थी, और एक रूबल में 100 कोपेक होते थे।

350 सिक्कों की नहीं कोई जानकारी

विशेषज्ञों के अनुसार, सिक्कों के इस भंडार में कोलोम्ना में वसीली I (जिन्होंने 1389 से 1425 तक राज किया) और वसीली II (जिन्होंने 1425 से 1462 तक राज किया) के समय ढाले गए सिक्के सबसे ज्यादा हैं। उस समय ये दोनों शासक मॉस्को के ग्रैंड प्रिंस थे और कोलोम्ना उनके शासन वाले बड़े क्षेत्र का हिस्सा था।

इस खजाने में मिले सिक्कों में एक बेहद खास डेंगा भी शामिल है, जिस पर उड़ते हुए पक्षी की आकृति बनी हुई है। माना जाता है कि ये सिक्का वसीली प्रथम के शासन के अंतिम दौर में तैयार किया गया था। वहीं, 350 से अधिक सिक्के ऐसी किस्म के हैं, जिनके बारे में पहले जानकारी नहीं थी। इन सिक्कों को लेकर एक्सपर्ट अभी गहराई से जांच कर रहे हैं।

अभी तक वजह नहीं चला पता

खजाने को जमीन में छिपाने की असली वजह अभी सामने नहीं आई है, लेकिन सिक्कों की उम्र से इस रहस्य को समझने में कुछ मदद मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस संग्रह में सबसे बाद के सिक्के 1420 के दशक के आखिर में बनाए गए थे। इसी आधार पर अंदाजा लगाया जा रहा है कि खजाना छिपाने वाला व्यक्ति 1424 से 1427 के बीच फैली प्लेग महामारी की चपेट में आ गया होगा और शायद इसके बाद वह अपने छिपाए हुए धन को वापस लेने नहीं लौट सका।

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