Lucknow Bridge: लखनऊ में एक फ्लाईओवर का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। दरअसल, यह निर्माणाधीन फ्लाईओवर सीधा एक बिल्डिंग में जाकर मिल गया। देखने वालों को यह नजारा काफी हैरान करने वाला लगा। फ्लाईओवर के लोहे के गार्डर सीधे इमारत की दीवार से जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जैसे कि पुल को इमारत के अंदर जाने के लिए ही बनाया गया हो। इस अजीबोगरीब नजारे का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। लोगों ने मजाक में इसे 'दुनिया का आठवां अजूबा' तक कह डाला। स्टैंड-अप कॉमेडियन तरुण लखनवी ने भी इस फ्लाईओवर का वीडियो शेयर किया, जिसे 20 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
पुल बनाने की क्यों पड़ी जरूरत?
महाराजापुर, पंडित खेड़ा, गंगाखेड़ा, केसरिखेड़ा और भवनिपुरम जैसे इलाकों में रहने वाले लोग सालों से रोजाना ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, कृष्णानगर और केसरिखेड़ा के बीच रेलवे क्रॉसिंग ट्रेनों के गुजरने के लिए दिन में 60 से ज्यादा बार बंद होता था। हर बार बंद होने पर, यात्रियों को 15-20 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे पीक आवर्स के दौरान लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। स्थानीय लोग इस नियमित परेशानी को कम करने के लिए एक ओवरब्रिज की मांग कर रहे थे। रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने राज्य सरकार और रेलवे से इस परियोजना को मंजूरी दिलाने में मदद की।
लगभग 1 किलोमीटर लंबा दो लेन के इस रेलवे ओवरब्रिज की अनुमानित लागत 74 करोड़ रुपये है। यह कृष्णानगर के ट्रैफिक पार्क के पास इंद्रलोक कॉलोनी को केसरिखेड़ा से जोड़ने वाला था। इसकी आधारशिला 17 जुलाई, 2023 को रखी गई थी, और फरवरी 2024 में काम शुरू हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया था कि 75 प्रतिशत काम पहले ही पूरा हो चुका था।
रिपोर्ट के मुताबिक, समस्या तब आई जब निर्माण पारा में कृष्णानगर-केसरी खेड़ा क्रॉसिंग पर पहुंचा। फ्लाईओवर के सीधे रास्ते में घर और दुकानें बनी हुई थीं और उनके मालिकों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला था। लेकिन यह बाधा लगभग तीन महीने तक जस की तस बनी रही। यही कारण है कि फ्लाईओवर के एक रिहायशी इमारत से मिलने वाले वीडियो और तस्वीरें ऑनलाइन सामने आईं।
सुलझा विवाद, जल्द शुरू होगा काम
अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस मामले को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप किया। शनिवार, 28 जून को, छह सदस्यीय टीम ने 31 अलग-अलग लोगों की जमीन की पैमाइश की। कृषि भूमि के लिए मुआवजा सर्कल रेट के दोगुने यानी 7,240 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से तय किया गया। बता दें कि इससे पहले बेस प्राइस 3,620 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी।
उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के अधिकारियों ने बताया कि बिल्डिंग परिसर को तोड़ने का काम पहले से ही चल रहा है। शनिवार तक तीसरी मंजिल का आधे से ज्यादा हिस्सा तोड़ा जा चुका था। जानकारी एक मुताबिक, बिल्डिंग को पूरी तरह से गिराने और मलबा हटाने में लगभग सात से आठ दिन लगेंगे। एक बार जब ढांचा पूरी तरह से हटा दिया जाएगा, तो ओवरब्रिज पर बाकी निर्माण कार्य फिर से शुरू हो जाएगा।