इन दिनों अर्जेंटीना में एक अनोखा और हैरान करने वाला ट्रेंड तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। यहां के कई युवा खुद को मानसिक या आध्यात्मिक रूप से किसी जानवर से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं और उसी तरब व्यवहार भी करते हैं। इस नई पहचान को “थेरियन” नाम दिया गया है, जो अब सोशल मीडिया से निकलकर असल जिंदगी में भी दिखाई देने लगा है। पार्क, सड़क और सार्वजनिक जगहों पर किशोर जानवरों की तरह चलने, दौड़ने और एक्ट करने लगे हैं।
ये ट्रेंड खासतौर पर TikTok पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लाखों लोग इससे जुड़े वीडियो देख और शेयर कर रहे हैं। कुछ लोग इसे आत्म-अभिव्यक्ति का नया तरीका मानते हैं, तो कुछ के लिए ये एक अजीब और चौंकाने वाला बदलाव है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है।
पार्क बना ‘जंगल’, बदले हुए अंदाज में दिखे किशोर
हाल ही में Buenos Aires के एक पार्क में कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। किशोर कुत्ते, बिल्ली और लोमड़ी के मास्क पहनकर वहां इकट्ठा हुए। कोई चार पैरों पर दौड़ रहा था, तो कोई पेड़ों पर बैठकर जानवरों जैसी हरकतें कर रहा था। एक लड़की कुत्ते का मुखौटा पहनकर दौड़ रही थी, वहीं दूसरी बेल्जियन नस्ल के कुत्ते की तरह उछल-कूद कर रही थी।
सोशल मीडिया से शुरू, अब ग्राउंड पर ट्रेंड
ये ट्रेंड खासतौर पर TikTok पर तेजी से वायरल हुआ है। #therian हैशटैग के साथ लाखों पोस्ट शेयर किए जा चुके हैं। अर्जेंटीना इस मामले में लैटिन अमेरिका के कई देशों से आगे बताया जा रहा है। सोशल मीडिया की ताकत ने इस अजीब ट्रेंड को एक बड़े मूवमेंट में बदल दिया है।
दिलचस्प बात ये है कि हर थेरियन खुद को सच में जानवर नहीं मानता। कुछ युवा इसे सिर्फ एक फन एक्टिविटी की तरह करते हैं—मास्क पहनना, चारों पैरों पर चलना या अलग तरह से खुद को एक्सप्रेस करना। वहीं कुछ लोग इसे अपनी पहचान का हिस्सा मानते हैं और कहते हैं कि यह उन्हें सुकून देता है।
लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस ट्रेंड को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ इसे क्रिएटिव और मजेदार मान रहे हैं, तो कुछ लोग इसे अजीब या चिंताजनक बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस पर बहस छिड़ी हुई है—कोई इसे आत्म-अभिव्यक्ति कह रहा है तो कोई इसे ट्रेंड का बढ़ता प्रभाव बता रहे हैं।
क्या ये मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ये सिर्फ एक प्रतीकात्मक या मनोरंजन का तरीका है, तो ये सामान्य माना जा सकता है। लेकिन जब कोई व्यक्ति पूरी तरह खुद को जानवर मानने लगे और इससे उसके व्यवहार या सुरक्षा पर असर पड़े, तब ये चिंता का विषय बन सकता है।