जब भी हम मॉल, सिनेमा हॉल, अस्पताल या ऑफिस जैसी जगहों के पब्लिक टॉयलेट में जाते हैं, तो एक दिलचस्प बात हमेशा दिखाई देती है, उनके दरवाजे नीचे से थोड़े खुले रहते हैं। यानी दरवाजा पूरा नीचे तक नहीं होता, बल्कि फर्श से कुछ इंच ऊपर ही खत्म हो जाता है। वहीं, हमारे घरों या होटलों के बाथरूम में दरवाजे ऊपर से नीचे तक पूरे बंद रहते हैं। ऐसे में मन में सवाल आता है कि सार्वजनिक जगहों के टॉयलेट में ही दरवाजे नीचे से आधे क्यों छोड़े जाते हैं? क्या ये सिर्फ डिजाइन का मुद्दा है या इसके पीछे कोई खास कारण होता है?
असल में इसका एक नहीं बल्कि कई मजबूत कारण हैं, जिनका संबंध साफ-सफाई, सुरक्षा और सुविधा तीनों से है। आइए जानते हैं कि आखिर टॉयलेट दरवाजों को इस खास तरीके से बनाया ही क्यों जाता है।
साफ-सफाई में होती है आसानी
पब्लिक टॉयलेट्स को दिन में कई बार साफ करना पड़ता है। नीचे गैप होने से सफाई कर्मचारी बिना अंदर जाए पानी या वाइपर से गंदगी बाहर निकाल सकते हैं। इससे अंदर की फर्श जल्दी और अच्छे से साफ होती है।
बदबू और हवा निकलने की जगह मिलती है
फर्श और दरवाजे के बीच खाली जगह वेंटिलेशन का काम करती है। इससे अंदर की दुर्गंध आसानी से बाहर निकलती है और हवा का आवागमन बना रहता है, जिससे टॉयलेट कम बदबूदार रहता है।
इमरजेंसी में काम आता है यह डिजाइन
अगर किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब हो जाए या वह अंदर बेहोश हो जाए तो स्टाफ नीचे के गैप से देख सकता है और जरूरत पड़ने पर दरवाजा ऊपर से तोड़े बिना उसे निकाल सकता है। सिक्योरिटी के लिहाज से यह डिजाइन बेहतर माना जाता है।
ज्यादा टिकाऊ और कम खराब होने वाले
पब्लिक टॉयलेट्स में दरवाजे हर थोड़ी देर में पानी और नमी के संपर्क में आते हैं। अगर दरवाजा नीचे से खुला रहे तो उसका निचला हिस्सा बार-बार भीगने से बच जाता है और वह लंबे समय तक नहीं सड़ता या खराब नहीं होता।
सुरक्षा और निगरानी में मददगार
ऐसे दरवाजों से ये पता लगाया जा सकता है कि अंदर कोई है या नहीं। साथ ही अगर कोई धूम्रपान या अन्य गलत काम कर रहा हो तो सिक्योरिटी आसानी से अंदर झांक सकती है। बाहर से ताला लगाने जैसी हरकत होने पर भी ऐसे दरवाजे को खोलना आसान होता है।