Total lunar eclipse 2026: 3 मार्च को लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, जानें क्यों खास होगा फाल्गुन पूर्णिमा का चांद?

Total lunar eclipse 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगेगा। इस चंद्र ग्रहण को कई मामलों में खास बताया जाता रहा है। भारत में ये कब और कैसा दिखाई देगा और ये कब शुरू होगा? इन सारे सवालों के जवाब जानने के लिए यहां पढ़ें। साथ ही जानें भारत में सूतक काल कब से लगेगा

अपडेटेड Feb 27, 2026 पर 6:48 PM
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वैज्ञानिकों का कहना है कि साल के पहले चंद्र ग्रहण में रंगों का अनोखा कंट्रास्ट देखने को मिल सकता है।

Total lunar eclipse 2026: अगर आपको लगता है कि दुर्लभ खगोलीय घटानाओं के मामले में फरवरी के महीने ने बाजी मार ली है, तो आप गलत हैं। मार्च में एक और बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना घटने जा रही है, खगोल प्रेमी जिसका इंतजार बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ये साल 2026 का पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत सहित दुनिया के कई देशों में दिखाई देगा। भारत के लिए ये चंद्र ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि इसकी जुगलबंदी रंगों के पर्व होली के साथ हो रही है। ये पूर्ण चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा की रात को लगेगा। खगोली विदो का मानना है इस बार के चंद्र ग्रहण में चंद्रमा आमतौर से नजर आने वाले तांबई लाल रंग से अलग नेवी ब्लू और गहरे लाल रंग का हो सकता है।

पूर्ण चंद्र ग्रहण पर स्काईवॉचर्स अक्सर तांबई रंग के चांद की उम्मीद करते हैं। लेकिन इस साल यह अलग दिख सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह 2026 का पहला चंद्र ग्रहण है और इसमें आसमान में रंगों का अनोखा कंट्रास्ट देखने को मिल सकता है। यह नजारा सटीक कॉस्मिक अलाइनमेंट पर निर्भर करता है।

ग्रहण के दौरान चांद लाल क्यों हो जाता है?

चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा और सूरज के बीच में पृथ्वी आती है। चंद्रमा तक आने वाली सूरज की सीधी रोशनी पृथ्वी से ब्लॉक हो जाती है। धरती का वातावरण बची हुई रोशनी को अंदर की ओर मोड़ देता है। इस बेंडिंग इफेक्ट को रेले स्कैटरिंग कहते हैं। इसी प्रक्रिया की वजह से दिन का आसमान नीला नजर आता है। इससे सूर्योदय और सूर्यास्त भी लाल रंग के होते हैं।

पूर्णता के दौरान, चांद पृथ्वी के अम्ब्रा में प्रवेश करता है। केवल लंबी लाल वेवलेंथ ही चांद की सतहों तक पहुंचती हैं। इससे जानी-पहचानी ब्लड मून चमक पैदा होती है। लाल रंग वातावरण की स्थिति पर निर्भर करता है। धूल और पार्टिकल्स आखिरी कलर टोन पर असर डालते हैं।

2026 का चंद्र ग्रहण अलग क्यों है?


खगोलशास्त्रियों इस बार चंद्र ग्रहण में कुछ अलग नजारा दिखने की उम्मीद है। चांद अम्ब्रा के ऊपरी किनारे से गुजरेगा। लाइट ऊंची स्ट्रैटोस्फेरिक लेयर्स से गुजरेगी। इन परतों में धूल कम होती है। बदला हुआ रास्ता ट्रांसमिटेड वेवलेंथ को काफी बदल देता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि ओजोन एक अहम भूमिका निभाता है। इसका प्रभाव चैप्यूस एब्जॉर्प्शन बैंड्स पर पड़ता है। इनका नाम जेम्स चैप्यूस के नाम पर रखा गया है। ओजोन कण पीली और लाल रोशनी को सोख लेते हैं। इस फिल्टरिंग से नीले रंग हावी हो जाते हैं और एक नेवी या फिरोजा रंग का किनारा दिख सकता है। पृथ्वी की परछाई की सीमा अलग तरह से चमकती है।

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