ट्रेन में सफर करना लगभग हर किसी को बहुत पसंद होता है। धीमी गति में खिड़की के बाहर गुजरते नजारे, हरी-भरी वादियां, शहर और गांव के दृश्य, सभी सफर को खास बना देते हैं। लेकिन सिर्फ ये दृश्य ही नहीं, ट्रेन के सफर में कई ऐसी चीजें होती हैं जो आम यात्रियों की नजरों से छिपी रहती हैं। उनमें से एक बेहद रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य है – ट्रेन के पहिये। अक्सर लोग ट्रेन के पहियों को सिर्फ भारी और मजबूत समझते हैं, लेकिन इनका आकार, वजन और निर्माण रेलवे की सुरक्षा और संचालन में अहम भूमिका निभाता है।
ट्रेन के डिब्बों और इंजन में अलग-अलग प्रकार के पहिये लगे होते हैं, जिनका वजन भी अलग-अलग होता है। कुछ पहिये हल्के होते हैं तो कुछ इतने भारी कि उन्हें उठाना अकेले संभव नहीं। आज हम आपको इसी तथ्य के बारे में विस्तार से बताएंगे और जानेंगे कि ट्रेन के पहिये कैसे बनाए जाते हैं और उनका वजन कितना होता है।
ट्रेन सिर्फ यात्रियों को ले जाने का काम नहीं करती, बल्कि माल भी ढोती है। इसके इंजन और डिब्बों में अलग-अलग वजन के पहिये लगे होते हैं। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) के अनुसार, ट्रेन के पहियों का वजन उनके प्रकार और इस्तेमाल पर निर्भर करता है।
LHB कोच के एक पहिये का वजन लगभग 326 किलो होता है।
ब्रॉड गेज ट्रेन के डिब्बों के पहिये का वजन 384 से 394 किलो तक होता है।
EMU ट्रेन के डिब्बों के पहिये का वजन लगभग 423 किलो होता है।
इंजन के पहिये डिब्बों के पहियों से ज्यादा भारी और मजबूत बनाए जाते हैं क्योंकि इंजन को पूरी ट्रेन खींचना होता है।
नैरो गेज इंजन का एक पहिया: 144 किलो
मीटर गेज इंजन का एक पहिया: 421 किलो
डीजल इंजन का एक पहिया: 528 किलो
इलेक्ट्रिक इंजन का एक पहिया: 554 किलो
ट्रेन के पहिये भारी होने के कारण इनकी सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। अगर कोई पहिया गिर जाए तो गंभीर चोटें लग सकती हैं। इसलिए रेलवे हर पहिये की नियमित जांच और रखरखाव करता है।