Viral News from Bihar: बिहार के गया जिले में एक ऐसी रोचक घटना सामने आई है, जिसने पुलिस को भी असमंजस में डाल दिया है। यहां एक भैंस पर दो लोगों ने अपना मालिकाना हक जताया है। मामला इतना पेचीदा हो गया कि अब बिहार पुलिस भैंस के असली मालिक का पता लगाने के लिए DNA टेस्ट कराने पर विचार कर रही है। आमतौर पर DNA टेस्ट का इस्तेमाल इंसान के पितृत्व या रिश्तों की पुष्टि के लिए किया जाता है। लेकिन गया में इसका इस्तेमाल एक भैंस के मालिक की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।
'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला बिहार के गया जिले के सेउतर गांव का है। यहां रहने वाले सूरज यादव का दावा है कि उनकी भैंस अचानक लापता हो गई थी। सूरज के मुताबिक, काफी तलाश के बाद करीब एक सप्ताह बाद उन्हें अपनी भैंस प्रकाश मांझी के घर पर मिली। इसके बाद सूरज भैंस को अपने घर ले आए।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। प्रकाश मांझी ने इस पर आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत कर दी। उनका कहना है कि भैंस उनकी है। उन्होंने इसे किसी व्यक्ति से कानूनी तौर पर लीज पर लिया था। इस तरह एक ही भैंस पर दो लोगों का दावा सामने आ गया।
पुलिस ने निकाला देसी तरीका, लेकिन मामला और उलझ गया
विवाद सुलझाने के लिए पुलिस ने शुरुआत में एक बेहद साधारण तरीका अपनाया। पुलिस ने भैंस को दोनों पक्षों के सामने छोड़ दिया, ताकि वह खुद उस जगह चली जाए जिसे वह अपना घर समझती है। भैंस सीधे सूरज यादव के घर पहुंच गई। सूरज के लिए यह उनकी बात का सबूत था। लेकिन प्रकाश मांझी इससे संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने इसके बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करा दी। इसके बाद मामला केवल दो लोगों के बीच भैंस के मालिकाना हक का विवाद नहीं रहा। बल्कि इसमें राजनीतिक रंग भी आ गया।
पूर्व RJD विधायक ने सूरज यादव का पक्ष रखा
अटरी के पूर्व RJD विधायक अजय यादव उर्फ रंजीत यादव सोमवार 26 अगस्त को सूरज यादव के समर्थकों के साथ मगध रेंज के IG विकास वैभव से मिलने पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधिकारी के सामने सूरज यादव की परेशानी का मुद्दा उठाया। पूर्व विधायक ने सवाल किया कि एक गरीब व्यक्ति को एक भैंस के विवाद के कारण मुकदमेबाजी में इतना पैसा खर्च करना पड़े, यह कितना उचित है। उनका तर्क था कि मुकदमे में खर्च होने वाली रकम शायद नई भैंस खरीदने से भी ज्यादा हो सकती है।
अगले दिन मांझी के समर्थन में पहुंचे HAM नेता
मामले ने राजनीतिक रूप से एक और मोड़ तब लिया जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण मंगलवार को इस मामले में IG से मिले। उन्होंने प्रकाश मांझी का पक्ष रखते हुए मामले में उनकी शिकायत और दावे को सामने रखा। इस तरह पुलिस के सामने चुनौती और बढ़ गई। एक तरफ यादव अपनी भैंस बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ मांझी भी दस्तावेजों और लीज के आधार पर अपना दावा कर रहे हैं।
अब DNA टेस्ट से होगा फैसला?
विवाद का कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकलने पर पुलिस ने अब DNA टेस्ट को एक विकल्प के रूप में सामने रखा है। मगध IG विकास वैभव ने बताया कि जरूरत पड़ने पर DNA टेस्ट कराया जा सकता है। पुलिस ने दोनों दावेदारों से उनकी भैंस से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे हैं। पुलिस का मानना है कि इन रिकॉर्ड में भैंस की वंशावली यानी उसके माता-पिता या अन्य पारिवारिक पशुओं से संबंधित जानकारी हो सकती है। संदिग्ध भैंस का DNA उसके कथित माता-पिता या भाई-बहन के DNA से मिलाकर यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि वह किस पक्ष की भैंस है।
अगर पुलिस वास्तव में DNA टेस्ट कराती है, तो गया में किसी भैंस के मालिकाना हक का फैसला करने के लिए DNA जांच का यह अपनी तरह का पहला मामला हो सकता है। फिलहाल, पांच साल की यह भैंस सूरज यादव के घर पर ही है। भैंस को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद जारी है और पुलिस दस्तावेजों की जांच कर रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस भैंस ने खुद चलकर सूरज यादव के घर पहुंचकर विवाद को एक दिशा देने की कोशिश की, अब उसके मालिक का अंतिम फैसला DNA रिपोर्ट से हो सकता है।