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IMD Alert: बिजली गिरने के पीछे क्या साइंस है, बादलों में ऐसा क्या है कि लाइटनिंग होती है? इसे एक लाइन में समझें

IMD Alert: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बादलों में पानी और बर्फ के कणों के टकराने से पैदा होने वाला विद्युत आवेश (Electric Charge) जब जमीन के संपर्क में आकर अचानक डिस्चार्ज होता है, तो बिजली गिरती है। आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी प्रक्रिया।

Shradha Tulsyanअपडेटेड May 16, 2026 पर 2:58 PM
IMD Alert: बिजली गिरने के पीछे क्या साइंस है, बादलों में ऐसा क्या है कि लाइटनिंग होती है? इसे एक लाइन में समझें
बिजली चमकने और बिजली गिरने का पूरा साइंस समझें

मौसम में अचानक बदलाव, काले घने बादल, तेज हवाएं और फिर अचानक आसमान को चीरती हुई बिजली की कड़कड़ाहट यह एक ऐसा नजारा है जो जितना खूबसूरत लगता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। अक्सर हमारे मन में यह सवाल उठता है कि आखिर आसमान में बिजली क्यों और कैसे कड़कती है और यह जमीन पर क्यों गिरती है? हाल ही में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोशल मीडिया पर इस रहस्य से पर्दा उठाते हुए इसके पीछे के दिलचस्प विज्ञान को समझाया है, साथ ही लोगों को सुरक्षित रहने के लिए कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस भी जारी की हैं।

क्या है बिजली गिरने के पीछे का विज्ञान?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बिजली कड़कने की पूरी प्रक्रिया बादलों के भीतर होने वाली हलचल से जुड़ी है। जब आसमान में काले घने बादल छाते हैं, तो उनके भीतर पानी की छोटी बूंदें और बर्फ के कण (Ice Crystals) तेज हवा के कारण आपस में लगातार टकराते हैं।

* विद्युत आवेश (Electric Charge) का बनना: इस आपसी टकराव या घर्षण की वजह से बादलों में स्थैतिक बिजली यानी इलेक्ट्रिक चार्ज पैदा होता है। बादल का ऊपरी हिस्सा सकारात्मक (Positive) चार्ज से और निचला हिस्सा नकारात्मक (Negative) चार्ज से भर जाता है।

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