तमिलनाडु के असनूर इलाके में एक सामान्य सफर उस वक्त डरावने अनुभव में बदल गया, जब जंगल की तरफ से निकला एक जंगली हाथी अचानक एक कार के सामने आ गया। बेंगलुरु-दिंडीगुल राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रही गाड़ी में बैठे यात्रियों ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि अगले कुछ सेकंड में उन्हें इतने करीब से हाथी का सामना करना पड़ेगा।
कार मैसूर से कोयंबटूर की ओर जा रही थी। इसी दौरान हाथी सड़क के पास पहुंचा और वाहन के बेहद नजदीक आ गया। देखते ही देखते उसने कार पर अपना पैर रख दिया। विशाल जानवर को इतने करीब देखकर अंदर बैठे यात्रियों की घबराहट बढ़ गई।
हाथी के वजन से कार का साइड मिरर टूट गया, लेकिन राहत की बात यह रही कि वाहन में सवार किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई। घटना के बाद यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत यही थी कि हाथी ने ज्यादा देर तक वाहन के आसपास रुकने के बजाय वहां से दूरी बना ली। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया कि जंगल से होकर गुजरने वाले हाईवे पर कुछ सेकंड की लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
सड़क नहीं, हाथियों का पुराना रास्ता भी है यह इलाका
असनूर का इलाका जंगलों से घिरा हुआ है और यहां से गुजरने वाले रास्तों पर वन्यजीवों की आवाजाही देखी जाती है। आसपास के जंगल चामराजनगर क्षेत्र और बांदीपुर टाइगर रिजर्व से जुड़े वनक्षेत्रों के करीब हैं।
हाथियों के लिए जंगल से जंगल तक आने-जाने के प्राकृतिक रास्ते मौजूद हैं। ऐसे में जब हाईवे इन इलाकों के बीच से गुजरता है, तो कई बार इंसानों और वन्यजीवों का रास्ता एक ही जगह पर आ मिलता है।
खाने की खुशबू भी खींच सकती है हाथियों को
वन विभाग लंबे समय से वाहन चालकों को आगाह करता रहा है कि जंगल वाले रास्तों पर जानवरों को देखकर रुकना या उन्हें खाना देना भारी पड़ सकता है। खासतौर पर सब्जियों, गन्ने या अन्य खाद्य सामग्री की मौजूदगी हाथियों को वाहनों के करीब ला सकती है।
एक बार अगर किसी हाथी को गाड़ियों से खाना मिलने लगे, तो वह वाहनों के पास आने का आदी हो सकता है। इससे अगली बार सामना होने पर स्थिति और ज्यादा खतरनाक बन सकती है।
ऐसे इलाकों में सफर करने वालों के लिए सबसे जरूरी बात है कि हाथी दिखाई देने पर वाहन से बाहर न निकलें और उसके करीब जाने की कोशिश न करें। हॉर्न बजाकर या रास्ता रोककर उसे परेशान करना भी जोखिम बढ़ा सकता है।