कौन है ये रहस्यमय मेंढक जो मरकर भी बार-बार जिंदा हो जाता है? जानिए सच!

वुड फ्रॉग (Wood Frog) उत्तरी अमेरिका के बर्फीले जंगलों का एक छोटा लेकिन अद्भुत जीव है। सर्दियों में यह बर्फ में जमकर लगभग निष्क्रिय हो जाता है, दिल और सांसें रुक जाती हैं, फिर भी जीवित रहता है। मौसम बदलते ही यह फिर से सक्रिय होकर सामान्य जीवन में लौट आता है, जो प्रकृति का चौंकाने वाला चमत्कार है

अपडेटेड Jun 30, 2026 पर 10:14 AM
हैरानी की बात यह है कि इस प्रक्रिया से इसके अंगों को कोई नुकसान नहीं होता।

वुड फ्रॉग (Wood Frog) उत्तरी अमेरिका के घने और बर्फीले जंगलों में पाया जाने वाला एक छोटा लेकिन बेहद रहस्यमय जीव है, जिसका वैज्ञानिक नाम Rana sylvatica है। देखने में यह बिल्कुल साधारण सा मेंढक लगता है, लेकिन इसकी जीवनशैली प्रकृति के सबसे बड़े चमत्कारों में से एक मानी जाती है। कड़क ठंड और बर्फीले मौसम में भी यह जीव ऐसी अद्भुत क्षमता दिखाता है, जो आम तौर पर किसी जीव के लिए असंभव लगती है। सर्दियों के दौरान जब तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है, तब इसका शरीर लगभग पूरी तरह बर्फ में जम जाता है और यह निष्क्रिय अवस्था में चला जाता है।

दिल की धड़कन और सांसें रुक जाती हैं, फिर भी यह जीवित रहता है। जैसे ही मौसम बदलता है और गर्मी लौटती है, ये फिर से सक्रिय होकर सामान्य जीवन में लौट आता है। यही अनोखी क्षमता इसे वाइल्डलाइफ का सबसे रोमांचक जीव बनाती है।

सर्दी आते ही फ्रीज मोडमें चला जाता है


जब तापमान माइनस में गिरता है, यह मेंढक जमीन की पत्तियों और मिट्टी के नीचे छिपकर खुद को पूरी तरह जमने देता है। उसका शरीर बर्फ में बदल जाता है और वह हफ्तों तक लगभग निर्जीव अवस्था में पड़ा रहता है।

प्रकृति का एंटीफ्रीज सिस्टम

जैसे ही ठंड बढ़ती है, इसका लीवर ग्लूकोज और कभी-कभी ग्लिसरॉल बनाना शुरू करता है। ये दोनों मिलकर शरीर के लिए प्राकृतिक एंटीफ्रीज का काम करते हैं। इससे कोशिकाएं जमकर फटती नहीं हैं, बल्कि सुरक्षित रहती हैं।

दिल, सांस और दिमाग सब हो जाते हैं बंद

इस अवस्था में वुड फ्रॉग का दिल धड़कना बंद कर देता है, सांसें रुक जाती हैं और मस्तिष्क की गतिविधि भी लगभग खत्म हो जाती है। बाहर से देखने पर ये पूरी तरह मृत जैसा लगता है, लेकिन अंदर जीवन किसी तरह सुरक्षित रहता है।

65-70% शरीर बन जाता है बर्फ

इस दौरान इसके शरीर का बड़ा हिस्सा बाहर से जम जाता है, लेकिन कोशिकाएं एक तरह के “सिरप” जैसे तरल में सुरक्षित रहती हैं, जिससे वो टूटती नहीं हैं।

बसंत आते ही फिर से जाग उठता है जीवन

जैसे ही तापमान बढ़ता है और बर्फ पिघलती है, इसका शरीर धीरे-धीरे दोबारा सक्रिय होने लगता है। सबसे पहले दिल धड़कता है, फिर सांस लौटती है और कुछ ही घंटों में ये पूरी तरह सामान्य हो जाता है।

कभी-कभी एक साल में कई बार फ्रीज और अनफ्रीज

अगर मौसम बार-बार बदलता है, तो यह मेंढक एक ही सीजन में कई बार जम और पिघल सकता है। यानी यह बार-बार “मृत जैसा” होकर फिर जीवन में लौट आता है।

अंगों पर कोई असर नहीं

हैरानी की बात यह है कि इस प्रक्रिया से इसके अंगों को कोई नुकसान नहीं होता। याददाश्त और शरीर दोनों बिल्कुल सामान्य रहते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे गहराई से समझने की कोशिश कर रहे हैं।

मानव विज्ञान के लिए बड़ी उम्मीद

वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर इस प्रक्रिया को समझ लिया जाए, तो भविष्य में अंग प्रत्यारोपण, स्ट्रोक ट्रीटमेंट और कोशिकाओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिल सकती है।

प्रकृति का मौत को मात देने वालाखिलाड़ी

वुड फ्रॉग की जिंदगी दिखाती है कि प्रकृति में जीवन और मृत्यु की सीमाएं उतनी सीधी नहीं हैं जितनी हम सोचते हैं। यह जीव हर सर्दी में बर्फ से लड़ता नहीं, बल्कि उसे अपनाकर जीत जाता है, और फिर हर बार नए जीवन के साथ लौट आता है।

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