नौकरी करने वाले लोगों के लिए सालाना सैलरी हाइक का इंतजार काफी अहम होता है। बढ़ती महंगाई के बीच वेतन में होने वाली बढ़ोतरी से घर का बजट संभालने में मदद मिलती है। लेकिन सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho के कर्मचारियों को इस साल निराशा का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बताया है कि इस साल कर्मचारियों की सैलरी में सामान्य सालाना बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बढ़ते खर्च, सर्वर की महंगी कीमतें और वैश्विक कारोबारी अनिश्चितता जैसे कारण हैं। हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों को यह भरोसा भी दिया है कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की पूरी कोशिश करेगी।
Zoho कर्मचारियों को इस साल नहीं मिलेगा सालाना इंक्रीमेंट
श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी की मौजूदा स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का भविष्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है और AI के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों का खर्च काफी बढ़ गया है। इसी दबाव के चलते Zoho ने इस साल कर्मचारियों की सामान्य वेतन वृद्धि रोकने का फैसला किया है। वेम्बू ने स्वीकार किया कि यह फैसला लेना आसान नहीं था। उन्होंने कर्मचारियों से माफी भी मांगी कि वह इस साल सैलरी हाइक को जारी नहीं रख सके।
AI के कारण चार गुना बढ़ी सर्वर की कीमतें
कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक डेटा सेंटर के लिए जरूरी सर्वर की बढ़ती लागत है। वेम्बू के मुताबिक, सर्वर की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं। इसके अलावा, AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के कारण कंपनी के परिचालन खर्च में भी इजाफा हुआ है। इन बढ़ते खर्चों को नियंत्रित करने के लिए Zoho ने अपने मार्केटिंग बजट में कटौती की है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी कारोबारी माहौल को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश
सैलरी हाइक रोकने के फैसले के बीच कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी फिलहाल बड़े पैमाने पर छंटनी से बचना चाहती है। वेम्बू ने कहा कि कंपनी कर्मचारियों की बड़े स्तर पर नौकरी जाने की स्थिति से बचने के लिए पूरी मेहनत करेगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र में नौकरियों का भविष्य चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, Zoho ने पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की है। इससे कंपनी में भर्ती की रफ्तार धीमी रहने का संकेत मिलता है।
अगले 3 से 5 साल Zoho के लिए अहम
वेम्बू ने बताया कि कंपनी इस समय खुद को नए कारोबारी माहौल के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया में है। अगले तीन से पांच साल यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कंपनी का बदलाव कितना सफल रहता है।
उन्होंने कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार भी जताया। उनके मुताबिक, ज्यादातर कर्मचारी कंपनी की स्थिति को समझ रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब तकनीकी कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने के साथ अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की चुनौती का सामना कर रही हैं।