Middle East Conflict: इजरायल-ईरान युद्ध के कारण हवाई सेवाएं ठप होने से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में फंसे हजारों पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर आई है। आबू धाबी और दुबई की सरकारों ने मानवीय मिसाल पेश करते हुए घोषणा की है कि जो लोग उड़ानों की कमी के कारण स्वदेश नहीं लौट पा रहे हैं, वे बिना किसी अतिरिक्त खर्च के होटलों में रुक सकेंगे।
आबू धाबी सरकार भरेगी होटल का बिल
आबू धाबी के संस्कृति और पर्यटन विभाग (DCT) ने सभी होटलों के लिए एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, जिन मेहमानों की चेक-आउट की तारीख निकल चुकी है लेकिन वे यात्रा करने में असमर्थ हैं, होटल उनका स्टे बढ़ाएंगे। इस बढ़े हुए स्टे का आर्थिक बोझ न तो होटल पर पड़ेगा और न ही मेहमानों पर। इसका पूरा भुगतान खुद आबू धाबी सरकार करेगी। होटल प्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि वे बिल सीधे विभाग को भेजें।
आबू धाबी के साथ-साथ दुबई के अर्थव्यवस्था और पर्यटन विभाग ने भी होटल संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं। दुबई सरकार ने कहा है कि प्रभावित यात्रियों को उनकी बुकिंग की शर्तों पर ही रुकने की अनुमति दी जाए, ताकि संकट के समय उन पर आर्थिक दबाव न आए।
सोशल मीडिया पर सरकार की वाहवाही
यूएई सरकार के इस 'पीपल फर्स्ट' दृष्टिकोण की इंटरनेट पर जमकर तारीफ हो रही है। सोशल मीडिया यूजर्स इसे संकट मैनेजमेंट का 'बॉस लेवल' तरीका बता रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि जहां अन्य जगहों पर आपदा के समय कीमतें बढ़ा दी जाती हैं, वहीं आबू धाबी मुफ्त में रहने की सुविधा दे रहा है। हीलियोस कैपिटल के संस्थापक समीर अरोड़ा सहित कई दिग्गजों ने सरकार के इस मानवीय कदम की सराहना की है।
20,000 से ज्यादा पर्यटक फंसे
रिपोर्ट्स के अनुसार, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों और 700 से ज्यादा उड़ानें रद्द होने की वजह से यूएई में करीब 20,000 पर्यटक और ट्रांजिट यात्री फंस गए हैं। ऐसे समय में इमरजेंसी वीजा जारी करने और मुफ्त ठहरने की सुविधा देने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूएई की छवि को एक सुरक्षित और जिम्मेदार पर्यटन स्थल के रूप में मजबूत किया है।